रामपाल के वकीलों की दलीलों पर सरकारी वकीलों की दलीलें इतनी भारी पड़ीं कि बाबा को उम्रकैद हो गई। अब आगे क्या कदम उठाएगा वो, जानकारी आई सामने। दो साल 10 महीने 27 दिन तक चले मामले में रामपाल की ओर से जहां 11 वकीलों की भारी-भरकम फौज थी, वहीं सरकार की ओर से केवल चार वकील केस की पैरवी कर रहे थे।
रामपाल के वकीलों की दलीलों के सामने सरकारी वकीलों की दलीलें भारी पड़ीं, जिन्होंने रामपाल को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। केस नंबर-429 में 19 नवंबर 2014 को बरवाला थाने में मामला दर्ज किया गया था। शुरू में तीन नामजद व अन्य के खिलाफ एफआईआर हुई थी।
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी वैसे-वैसे आश्रम से जुड़े लोग नामजद होते रहे। अंत में 15 आरोपियों के खिलाफ केस चला और 11 अक्तूबर 2018 को अदालत ने सभी 15 आरोपियों को दोषी करार दिया, जिन्हें 16 अक्तूबर को सजा सुनाई गई।
यह थे रामपाल की पैरवी करने वाले और सरकारी वकील
इस केस में रामपाल की पैरवी करने वालों में एमएस नैन, जेके गक्खड़, अभिषेक चौधरी, रामकिशोर गुर्जर, कपिल हुड्डा, राजबीर सिंह देहरान, जगबीर सिंह, सुमन, वर्षा, मनप्रीत कौर और हितेंद्र अत्रि शामिल थे। इसी प्रकार सरकार की तरफ से पब्लिक प्रोसीक्यूटर महेंद्रपाल, राजीव सरदाना, ओमप्रकाश व नरेंद्र कुमार पैरवी कर रहे थे।
रामपाल के वकीलों की दलीलें
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1. रामपाल बीमार था, डॉक्टरों ने बाहर आने-जाने से मना किया था, इसलिए वह बाहर नहीं आया था।
2. मृतकों की मौत का कारण दम घुटना था, जो पोस्टमार्टम में भी साफ है।
3. दम घुटने का कारण पुलिस द्वारा आंसू गैस के गोले फेंकना था।
4. मारे गए लोगों के शरीर पर बाहरी चोट का निशान नहीं था।
5. पुलिस के डर के कारण लोग आश्रम में शरण लिए थे।
सरकारी वकीलों की दलीलें
1. रामपाल के खिलाफ नॉन बेलेबल वारंट था, जिसकी उसको जानकारी थी और उसके बाहर न आने का कारण यही था।
2. उसने जान-बूझकर अपने को बचाने के लिए महिलाओं को ढाल बनाया और आगे कर दिया।
3. पुलिस गिरफ्तार करने पहुंची तो रामपाल की ओर से पुलिस के साथ मुठभेड़ शुरू की गई।
4. अपने बचाव के लिए रामपाल ने बहुत कम जगह में अधिक लोगों को ठूंसा, जिनमें बीमार भी थे। उन्हें इलाज के लिए भी नहीं जाने दिया।
5. जितनी भी मौतें हुईं, वह आश्रम परिसर में हुईं। इन्हें पता था कि लोग मर रहे हैं, लेकिन उन्हें बाहर नहीं जाने दिया। अत: पूरे प्रकरण को सोच-समझकर अंजाम दिया था।
रामपाल के वकील बोले- हाईकोर्ट में करेंगे अपील
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रामपाल के वकील जेके गक्खड़ ने कहा कि वह कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेंगे। उनकी तरफ से दलील दी गई थी कि मारे गए लोगों पर किसी तरह की कोई बाहरी इंजुरी नहीं है। आश्रम के अंदर के लोगों द्वारा किसी को टॉर्चर नहीं किया गया था। यह सब पुलिस में केस दर्ज करवाने वाले भी अपने बयान में कोर्ट को बता चुके हैं। मारे गए लोगों की हत्या में किसी तरह से भी उनको दोषी नहीं ठहराया जा सकता। कोर्ट का फैसला पढ़ने के बाद हम इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेंगे।
पब्लिक प्रोसीक्यूटर बोले- कोर्ट ने हमारे पक्ष को समझा
केस में सरकार की तरफ से पैरवी कर रहे पब्लिक प्रोसीक्यूटर राजीव सरदाना ने कहा कि इस केस में कोर्ट ने हमारे पक्ष को समझा और उसी आधार पर फैसला दिया है। हमारा पक्ष यही था कि मारे गए लोगों में से ज्यादातर बीमार थे। उनको इलाज की जरूरत थी। इलाज करवाने के बजाय रामपाल व अन्य लोगों ने उनको अपनी रक्षा के लिए ढाल बनाया। अगर समय पर इलाज मिलता तो वह बच सकते थे। इसी आधार पर कोर्ट ने इनकी मौत के लिए दोषियों को जिम्मेदार माना है और उनको सजा हुई है।