चंडीगढ़। अक्सर माना जाता है कि वैलेंटाइन डे युवाओं का त्योहार है लेकिन शहर के कुछ वरिष्ठ दंपती इस धारणा को हर साल प्रेम से बदल देते हैं। सफेद होते बाल, चेहरे की झुर्रियां और साथ बिताए दशकों का सफर इन सबके बीच उनका प्यार आज भी उतना ही ताजा है, जितना पहली मुलाकात में था।
65 वर्षीय उषा चावला और 66 वर्षीय तारा चंद की शादी को 45 वर्ष हो चुके हैं। मगर हर 14 फरवरी की सुबह उनके घर में वही हल्की सी घबराहट और मीठी सी मुस्कान लौट आती है। उषा बताती हैं कि शादी के समय से ही हमने इस दिन एक-दूसरे को गुलाब देने की परंपरा शुरू की थी। आज भी सुबह सबसे पहले हम एक-दूसरे को फूल देकर कहते हैं-तुम हो...इसलिए जिंदगी खूबसूरत है। उनके लिए यह दिन महंगे तोहफों का नहीं बल्कि साथ निभाने के वादे को फिर से दोहराने का होता है।
एक-दूसरे को मुस्कुराकर बधाई देते हैं
66 वर्षीय अनिल चड्डा की शादी 1988 में हुई। कहते हैं कि समय ने उनके रिश्ते को और मजबूत किया है। पहले हम गुलाब देते थे, अब एक-दूसरे को मुस्कुराकर बधाई देते हैं। बच्चों की शादी हो गई, जिम्मेदारियां बदल गईं। लेकिन साथ होने का एहसास वही है। इन जोड़ों की कहानी बताती है कि सच्चा प्रेम उम्र का मोहताज नहीं होता। वह हर साल एक गुलाब की तरह फिर से खिलता है और जिंदगी को महकाता रहता है।