चंडीगढ़। मेरे धरती के लोगो! जिंदगी जीना कोई गुनाह नहीं है। यह कुदरत का वरदान है, पर कुछ स्वार्थी लोग चाहते हैं कि जिंदगी जीने का हक सिर्फ उन्हें ही हो। वे लोग कभी औलिया का रूप धारण कर लेते हैं और कभी बादशाह का। सारे गुनाह वो खुद करते हैं, लेकिन गुनाहों का खौफ दूसरों के दिलों पर डालते हैं, क्योंकि वे खुद दूसरों की मेहनत पर अय्याशी करना चाहते हैं और करते हैं। आओ इसका फैसला करें। यह जगह जिंदगी के लिए है। उसकी जीत के लिए है, उसके जय जयकार के लिए है। यह दमदार संवाद नाटक ‘जब रोशनी होती है’ में युवा की भूमिका निभा रहे कलाकार रजत सचदेवा ने कहे। इस पर दर्शकों ने जोरदार तालियां बजाकर कलाकार का हौसला बढ़ाया। तीन दिवसीय नाट्य उत्सव के अंतिम दिन इसका मंचन हुआ। इंपैक्ट आर्ट्स के कलाकारों ने इसका मंचन किया। यह नाटक जीन पॉल सार्त्र के द फ्लाइज पर आधारित है। इसका रूपांतरण परमानंद शास्त्री ने किया है। नाटक को बनिंदरजीत सिंह बन्नी ने निर्देशित किया है। नाटक की शुरुआत में दिखाया गया कि हरी धरती है। एक बादशाह है, लेकिन उसकी प्रजा काला दिवस मना रही है। सभी लोग काला कपड़ा पहने हुए हैं और पश्चाताप कर रहे हैं। केवल बादशाह और मंत्री ही अच्छे कपड़े पहने हैं। तभी एक युवा आता है और वह देखता है कि वहां अंधेरा ही अंधेरा है। सभी काले कपड़े पहने हुए हैं।
उसी जगह एक निर्वस्त्र व्यक्ति मिलता है। उससे युवा पूछता है कि वह कपड़े क्यों नहीं पहनता तो वह कहता है कि आदमी नंगा पैदा हुआ और नंगा ही रहेगा और नंगा ही जाएगा। वह युवक को बताता है कि यह राजा और वजीर की साजिश है। वह किस प्रकार अपने ही नागरिकों को दबाते हैं। आखिर में वह नंगा आदमी और युवा राजा का विरोध करते हैं। वह जनता में विश्वास जगाते हैं। वह नागरिकों को कहता है कि राजा और वजीर ने झूठ फैला रखा है। उस जाल को तोड़ो। जिंदगी आगे बढ़ने का नाम है। आशावादी सोच रहो। नाटक के माध्यम से संदेश दिया गया कि अंधविश्वास पर ध्यान न दें। अपने दिमाग को खोलो। स्वयं पर भरोसा रखो।
नाटक में बनिंदर जीत सिंह, इकबाल सिंह, रंजीत सिंह, रूपिंदर कौर, जश्नदीप सिंह, चंदन कुमार, गुरविंदर सिंह, कमलदीप कौर, नेहा धीमान, पुष्पिंदर बग्गा, सिद्धार्थ कौशिक, रवितेज सिंह बराड़, मोहित, मनोज कुमार, सौरभ सैनी, सुमित स्वामी, सौरभ शर्मा, अमृतपाल सिंह, रजत सचदेवा, दीदार वर्मा, चरणजीत सिंह, शरण बगानिया, विक्रम गौतम, जतिन सचदेवा, रिंकू जानी, परनीत कौर, एकमवीर सिंह और नंदर कौर ने भूमिका निभाई है।