डेंगू और मलेरिया के अलावा एक और बीमारी चंडीगढ़ के लिए चुनौती बनती जा रही है। इसने स्वास्थ्य विभाग की नींद भी उड़ा दी है। दरअसल, चंडीगढ़ में कुष्ठ रोगों के केस बढ़ते जा रहे हैं। चंडीगढ़ में कुष्ठ रोग का प्रसार राष्ट्रीय औसत से ज्यादा पाया गया है। देश में जहां दस लाख की आबादी में 100 केस पाए जाते हैं, वहीं चंडीगढ़ में 112 केस पाए जा रहे हैं।
ये हालात तब हैं, जब स्वास्थ्य विभाग की ओर से कई व्यापक अभियान चलाए जा रहे हैं। कुष्ठ रोग का खात्मा और उनकी जल्दी पहचान के लिए अब यूटी डिपार्टमेंट कई कदम उठाने जा रहे हैं। सितंबर में रोग के रोकथाम के लिए बड़े स्तर पर अभियान शुरू किया जा रहा है।
इसके लिए पांच से 18 सितंबर तक शहर में लेप्रोसी केस डिटेक्शन कैंपेन (एलसीडीसी) लांच किया जा रहा है। इसके लिए 1100 हेल्थ वर्कर की 500 टीमें बनाई जा रही हैं। ये टीमे उन इलाकों का दौरा करेंगी, जहां पर केस ज्यादा पाए जा रहे हैं और उनकी लिस्ट बनाकर उनका इलाज कराएंगी।
इन इलाकों में ज्यादा केस
चंडीगढ़ स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक सेक्टरों के बजाय पेरीफेरी इलाकों से ज्यादा केस आ रहे हैं। इनमें प्रवासी लोगों की संख्या है। खासतौर पर मलोया व मनीमाजरा इलाके में। साल 2010-11 में कुल 227 केस, 2014-15 में कुल 305 केस। हालांकि इस साल पिछले वर्षों के मुकाबले कम आए। इस साल 274 केस दर्ज किए गए हैं।
लोग खुद भी चेक कर सकते हैं लक्षण
विशेषज्ञों का कहना है कि लोग खुद भी लक्षण पहचान सकते हैं। यदि किसी की त्वचा के रंग में परिवर्तन, संवेदनहीन होना व अन्य दूसरे लक्षण होते हैं। ये लक्षण दिखते हैं तो वे तुरंत नजदीकी क्लीनिक में दिखाएं और उसका इलाज होगा।
बताया गया है कि जो केस मिले हैं, उनका पता देरी से चला है। इसका मतलब साफ है कि लोगों में कुष्ठ रोग के प्रति अवेयरनेस काफी कम है। अभियान में इस बात भी पर फोकस रहेगा कि लोगों में ज्यादा से ज्यादा जागरुकता बढ़े।