उसी रास्ते से ट्रेग्यूलाइजर गन से तेंदुए पर निशाना साधा गया। सटीक निशाने के बाद तेंदुआ कुछ समय के लिए इधर-उधर भागा, फिर बेहोश हो गया। लकड़ियों से हिलाकर बेहोशी सुनिश्चित करने के बाद भीतर पहुंची टीमों ने उसे पिंजरे में डाल लिया।
कमरे में बछड़ी होने के कारण सभी को लगा कि तेंदुआ उसे नहीं छोड़ेगा लेकिन वह सकुशल मिली। टीम का कहना था कि तेंदुए को खुद खतरे का आभास था इसलिए उसे नुकसान नहीं पहुंचाया। पहले लोगों ने इसे बिज्जू समझा था। इसलिए सभी घटना को सामान्य मानते रहे लेकिन जब तेंदुए का पता चला तो सभी भयभीत थे।
रास्ता भटककर शहर में आया तेंदुआ
डीएफओ हरजीत कौर के अनुसार तेंदुआ हिमाचल बार्डर के जंगलों से रास्ता भटककर नारायणगढ़ के खेतों से होते हुए शहर पहुंचा होगा। बरवाला एयरफोर्स स्टेशन में मौजूद विभाग की वाइल्ड लाइफ की स्पेशल टीम ने करीब 1 घंटा 40 मिनट की कार्रवाई में उसे बेहोश कर पकड़ा। यह सबसे सफल ऑपरेशन रहा क्योंकि ऐसे मामलों में करीब 12 घंटे लगना सामान्य बात है। यदि तेंदुआ समय रहते पकड़ में न आता तो जानमाल का अधिक नुकसान होता। उसे कलेसर के जंगल में छोड़ दिया गया है।
कंट्रोलरूम से मिली थी वीटी
बलदेवनगर चौकी इंचार्ज एएसआई बरियाम सिंह के अनुसार विधानसभा चुनाव की तैयारियों के कारण वे गश्त पर थे तब कंट्रोलरूम से वीटी हुई थी। मौके पर जाकर दरवाजे को बेहद मजबूती से बंद कराने के साथ आलाधिकारियों व वन विभाग को सूचना दी गई। पहले बिज्जू की गलतफहमी हुई थी। वाइल्ड लाइफ की टीम की कार्रवाई में तेंदुआ पकड़ लिया गया।