रिसर्च पेपर डे पर चंडीगढ़ पीजीआई में विशेष कार्यक्रम
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रिसर्च जालसाजी को लेकर हुए खुलासे पढ़कर हैरान रह जाएंगे। भारत इसमें अव्वल, यूएस दूसरे नंबर पर और जापान तीसरे नंबर पर है। पीजीआई के रिसर्च डे पर पहुंचे श्री गंगाराम हास्पिटल के सर्जिकल गेस्ट्रोरेंट्रोलॉजी एंड आर्गन ट्रांसप्लांटेशन के चेयरमैन डा. समीरन नंदी ने भारत के मेडिकल इंस्टीट्यूट की रिसर्च पर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि रिसर्च में जालसाजी के सबसे ज्यादा मामले भारत में है।
डॉ. समीरन नंदी रिसर्च पब्लिकेशन एंड इथिक्स एन इंडियन पर्सपेक्टिव पर विचार व्यक्त कर रहे थे। समीरन ने साल 2000 - 2010 के बीच रिसर्च में जालसाजी के आंकड़े पेश करते हुए बताया कि रिट्रेक्शन और जालसाजी रिसर्च पेपर के मामलों में भारत का अनुपात 0.34 है, जो यूएस, जापान व चीन के मुकाबले ज्यादा है। दूसरे नंबर पर यूएस है, जिसका अनुपात 0.32 है। तीसरे नंबर पर जापान व चौथे नंबर पर चीन है।
ये अनुपात रिट्रेक्शन (जरनल से रिसर्च को हटाना) व फ्राड (जालसाजी) को मिलाकर निकाला गया है। उन्होंने रिसर्च में हो रहे जालसाजी के कारणों के बारे में भी बताया। इसके पीछे मुख्य रूप से बॉस को खुश करना, आथरशिप को उपहार के तौर पर देना, खुद की पब्लिसिटी करना, रिसर्च को चेक करने के लिए आसान तरीकों का इस्तेमाल करने जैसे कारण शामिल हैं।
समाधान बताते हुए उन्होंने कहा कि मेडिकल संस्थानों को एथिक्स कमेटी बनानी चाहिए, आईसीएमजेई गाइडलाइंस को लागू करना, जालसाजी को चेक करने के लिए नई तकनीक (गूगल व आइटेंटिकेट) का इस्तेमाल, गारंटर को नियुक्त करना व जरनल रिव्यूवर्स जैसे तकनीक का इस्तेमाल कर जालसाजी रोकी जा सकती है। पीजीआई पिछले चार सालों से रिसर्च डे मना रहा है।
आधे मेडिकल संस्थान रिसर्च नहीं कर रहे है
फाइल फोटो: मेडिकल रिपोर्ट
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प्रजेंटेशन के दौरान समीरन बताया कि भारत में 583 मेडिकल इंस्टीट्यूट हैं। लेकिन 332 की एक भी रिसर्च प्रकाशित नहीं हुई है। रिसर्च के मामले में एम्स (11,377) व पीजीआई (8145) बहुत अच्छा कार्य कर रहे हैं। इसके बावजूद विश्व स्तर में भारत की स्थिति अच्छी नहीं है। 1996-2014 तक साइटेड पब्लिकेशन में भारत के 2,07,909, जबकि यूएसए के 25 लाख हैं।
चीन में रिसर्च को ऐसे प्रमोट किया जा रहा
उन्होंने बताया कि चीन और भारत के रिसर्च कल्चर में जमीन आसमान का अंतर है। चीन में यदि कोई रिसर्च अच्छे जरनल में प्रकाशित होती है तो उस शोध को पुरस्कार के तौर पर एक साल की सैलरी दे दी जाती है। अन्य देशों में रिसर्चर को प्रमोशन दे दिया जाता है। जबकि भारत में निर्धारित समय पर ही प्रमोशन मिलेगा। चाहे अच्छी रिसर्च करो या नहीं।
पीजीआई में क्या हाल है
समीरन नंदी के लेक्चर के बाद पीजीआई के कुछ प्रोफेसरों से यहां के रिसर्च के माहौल पर बातचीत की गई, तो उनका कहना था कि यहां पर कुछ भी इन्सेंटिव नहीं मिलता। उल्टा फंड की कमी पड़ जाती है। इसके लिए खुद ही हाथपैर मारने पड़ते हैं। रिसर्च का फायदा प्रमोशन में मिलता है, लेकिन प्रमोशन निर्धारित समय पर मिलेगा।