चंडीगढ़। विश्व धरोहर शहर चंडीगढ़ की पहचान को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में बड़ा फैसला लिया गया है। सेक्टर-19 के ली कॉर्बुजिए सेंटर को विश्वस्तरीय डिजिटल म्यूजियम के रूप में विकसित करने के प्रस्ताव को शुक्रवार को चंडीगढ़ हेरिटेज कंजर्वेशन कमेटी (सीएचसीसी) ने मंजूरी दे दी। वहीं यूनेस्को विश्व धरोहर कैपिटल कॉम्प्लेक्स के बफर जोन में प्रस्तावित संशोधित जोनिंग योजना पर अंतिम फैसला टाल दिया गया। समिति ने इस प्रस्ताव को और स्पष्ट सिफारिशों के साथ दोबारा पेश करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव एच. राजेश प्रसाद की अध्यक्षता में हुई समिति की 27वीं बैठक में शहर की वास्तु विरासत, यूनेस्को मानकों के संरक्षण और भविष्य की विकास परियोजनाओं पर विस्तार से मंथन हुआ। बैठक में गृह सचिव मंदीप सिंह बराड़, वित्त सचिव दिप्रवा लाकड़ा, पर्यटन एवं संस्कृति सचिव डॉ. सैयद आबिद रशीद शाह, नगर निगम आयुक्त अमित कुमार, उपायुक्त निशांत कुमार यादव, मुख्य अभियंता सीबी ओझा, मुख्य वास्तुकार राजीव मेहता और चंडीगढ़ कॉलेज ऑफ आर्किटेक्चर की प्राचार्य डॉ. संगीता बग्गा मेहता सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
पर्यटन विभाग ने भारत सरकार की स्वदेश दर्शन-2.0 योजना के तहत ली कॉर्बुजिए सेंटर में डिजिटल म्यूजियम विकसित करने की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) पेश की। समिति को बताया गया कि संग्रहालय तैयार करते समय भवन की मूल विरासत संरचना से कोई छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। डिजिटल तकनीक के माध्यम से ली कॉर्बुजिए की विरासत, चंडीगढ़ की नियोजित वास्तुकला और शहर के इतिहास को आधुनिक तरीके से प्रदर्शित किया जाएगा। परियोजना में पर्यटन संभावनाओं, लागत, राजस्व मॉडल और संरक्षण उपायों को भी शामिल किया गया है। विस्तृत चर्चा के बाद समिति ने प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।
बफर जोन पर फैसला फिलहाल टला
बैठक में यूनेस्को विश्व धरोहर कैपिटल कॉम्प्लेक्स के बफर जोन में आने वाले सेक्टर-2, 3, 4 और 5 की संशोधित जोनिंग योजना पर भी चर्चा हुई। वरिष्ठ नगर योजनाकार मंदीप मेहंदीरत्ता ने चंडीगढ़ मास्टर प्लान-2031 के अनुरूप भवनों की ऊंचाई और विकास मानकों से संबंधित प्रस्ताव रखा। मुख्य सचिव ने कहा कि बफर जोन का मूल उद्देश्य विश्व धरोहर स्थल की दृश्य पहचान और विरासत मूल्य की रक्षा करना है। उन्होंने विभाग को अधिक स्पष्ट और तर्कसंगत प्रस्ताव दोबारा पेश करने के निर्देश दिए। इसके चलते इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय स्थगित कर दिया गया।
हाईकोर्ट मास्टर प्लान की भी समीक्षा
बैठक में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के होलिस्टिक डेवलपमेंट प्लान के मास्टर प्लान फ्रेमवर्क की भी समीक्षा की गई। इंजीनियरिंग विभाग के सलाहकारों ने हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुरूप तैयार रूपरेखा प्रस्तुत की। समिति ने योजना को विरासत संरक्षण के मानकों के अनुरूप आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।