चंडीगढ़। स्त्री-पुरुष के रिश्ते में अधूरेपन की समस्या, संबंधों में उलझाव और प्रेम त्रिकोण ने दर्शकों को आखिर तक जोड़े रखा। लेखक गिरीश कर्नाड के नाटक हयबदन ने दर्शकों को पति-पत्नी और दोस्ती के रिश्तों में प्यार, उसमें पनपे खालीपन, भ्रम, ईर्ष्या इत्यादि भावों से भावुक किया। रिश्ते में सम्पूर्णता की तलाश में पति देवदत्त की मौत दर्शकों को झकझोर देती है।
टैगोर के मिनी थिएटर में मंगलवार को चंडीगढ़ आर्ट थिएटर ने नाटक हयवदन का मंचन किया। नाटक में प्रमुख तीन किरदारों ने दर्शकों को भावुक कर दिया। नाटक में धर्मपुर नगर के देवदत्त, उनकी पत्नी पद्मिनी और देवदत्त के दोस्त कपिल में समय के साथ रिश्तों में आई दूरियों और प्रेम त्रिकोण के जाल ने नाटक को आकर्षित बनाया। रिश्तों के द्वंद्व में फंसे और आपसी समझ की कमी से देवदत्त और उनके दोस्त कपिल अपनी जान दे देते हैं। नाटक में किरदारों ने मानव जीवन के बुनियादी अंतर्विरोधों, संकटों और दबावों, तनावों को अत्यंत नाटकीय और कल्पनाशील रूप में अभिव्यक्त किया। दो घंटे के नाटक में कलाकार हरजोत, नीलम, सिद्धांत और वंश दर्शकों से नाटकीय अहसासों के माध्यम से रूबरू होंगे।
ज्यादातर युवा पहुंचे नाटक हयबदन देखने
लॉकडाउन के बाद टैगोर थिएटर में मंगलवार को पहले नाटक हयबदन की पेशकश की गई। इसे निर्देशक रंजीत रॉय ने निर्देशित किया। इसका आयोजन चंडीगढ़ आर्ट थिएटर ने करवाया। नाटक को देखने पहुंचे दर्शकों में ज्यादातर युवा थे। युवाओं के अलावा यूटी प्रशासक के सलाहकार मनोज परिदा, निर्देशक (संस्कृति) सौरव अरोड़ा, सचिव (संस्कृति) विनोद पी कावले भी पहुंचे।
निर्देशक रंजीत रॉय ने बताया कि रंगमंच कलाकार अब दोबारा दर्शकों से लाइव रूबरू होकर काफी उत्साहित हुए। नाटक मंचन के दौरान टैगोर थिएटर का सभागार दर्शकों से भरा हुआ था। दर्शक इस दौरान एक सीट छोड़कर बैठे थे। पहले दिन लगभग 50 दर्शक नाटक देखने पहुंचे।