फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दुनिया को अलविदा कहकर भी तीन लोगों को नई जिंदगी दे गईं लक्ष्मी देवी

विज्ञापन
दानदाता लक्ष्मी देवी की फाइल फोटो। - फोटो : CHANDIGARH
विज्ञापन
चंडीगढ़। यमुनानगर (हरियाणा) निवासी 45 वर्षीय लक्ष्मी देवी दुनिया को अलविदा कहकर भी तीन लोगों को नया जीवन दे गईं। लक्ष्मी देवी के निधन के बाद उनके बेटे ने पीजीआई को उनकी दोनों किडनी और लिवर का दान करा कर मौत से जिंदगी की जंग लड़ रहे तीन मरीजों को नया जीवन दिया। लक्ष्मी देवी के लिवर को ग्रीन कॉरिडोर की मदद से तय समय में दिल्ली के एक निजी अस्पताल में पहुंचाकर वहां प्रतीक्षारत मरीज की जान बचाई गई। वहीं, किडनी का प्रत्यारोपण पीजीआई में भर्ती दो मरीजों को किया गया। दोनों का लंबे समय से इलाज चल रहा था।
विज्ञापन

पीजीआई के निदेशक प्रो. जगतराम का कहना है कि लक्ष्मी देवी के बेटे विक्रम सिंह एक बहादुर और नेक इंसान हैं। अपनी मां को खोने का दुख बर्दाश्त करते हुए उन्होंने उनके अंगदान का निर्णय लेकर तीन लोगों को नई जिंदगी देने में मदद की। ऐसे परिवार की मदद से ही अंगदान की प्रतीक्षा सूची में शामिल मरीजों को पीजीआई में नया जीवन मिल रहा है।
घने कोहरे के बावजूद ग्रीन कॉरिडोर बनाकर सवा चार घंटे में दिल्ली पहुंचाया गया लिवर
पीजीआई रोटो के नोडल अधिकारी प्रो. विपिन कौशल ने बताया कि अंगदान में मिले लिवर के ग्रुप से मैच करता हुआ मरीज पीजीआई में न होने के कारण उसे ग्रीन कोरिडोर की मदद से दिल्ली के एक निजी अस्पताल में पहुंचाया गया। जहां लिवर को मैचिंग ग्रुप वाले मरीज में प्रत्यारोपित कर दिया गया है। इसमें चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा और नई दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने घने कोहरे के बीच सराहनीय प्रयास कर सवा चार घंटे में 314 किलोमीटर की दूरी तय करवा कर उस लिवर को जयपुर के मरीज में सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित करने में मदद की।
विज्ञापन

‘अंगदान करवाकर मां को दी सबसे बड़ी श्रद्धांजलि’
लक्ष्मी देवी के बेटे विक्रम सिंह ने बताया कि 15 जनवरी को एक दुर्घटना में उनकी मां गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। 16 जनवरी को उन्हें पीजीआई में शिफ्ट करवाया गया, जहां 21 जनवरी को उनकी मौत हो गई। विक्रम का कहना है कि अपनों को खोने का गम वह भली-भांति जानते हैं, इसलिए जब उन्हें अंगदान के बारे में बताया गया तो उन्होंने अपने मां का अंगदान कराने का निर्णय लिया। विक्रम का कहना है कि अंगदान करवा कर मैंने अपनी मां को सबसे बड़ी श्रद्धांजलि दी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें