चंड़ीगढ़। सेक्टर-43 स्थित जिला अदालत में सोमवार को वकीलों ने अपनी मांगों को लेकर वर्क सस्पेंड रखा। बार एसोसिएशन की ओर से चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश किराएदारी अधिनियम-2019 (यूटी टेनेंसी एक्ट) के कार्यान्वयन के विरोध में वकीलों ने नो वर्क डे घोषित किया है। इस लेकर अदालत में काम के सिलसिले में आए सैकड़ों लोगों का काम प्रभावित रहा। अदालत में रविवार की छुट्टी होने के चलते सोमवार को काम में अधिकता रहती है। कई लोग निराश होकर लौटे क्योंकि उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी कि वकीलों ने वर्क सस्पेंड रखा है। मंगलवार को भी वर्क सस्पेंड रहेगा। वहीं, अधिकतर मामलों में न्यायालय ने तारीख लगाकर अपनी कार्रवाई पूरी की।
बीते शनिवार को बार एसोसिएशन की ओर से जनरल हाउस की बैठक बुलाई गई थी, जिसमें सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यूटी टेनेंसी एक्ट के खिलाफ सोमवार से लेकर मांगें पूरी न होने तक अनिश्चितकालीन नो वर्क डे जारी रखेेंगे। बार एसोसिएशन के प्रधान रोहित खुल्लर ने कहा कि वकील अगर अपने अधिकारों के लिए के लिए लड़ाई नहीं लड़ेंगे तो कौन लड़ेगा। जब तक समस्या का समाधान नहीं हो जाता तब तक वर्क सस्पेंड जारी रहेगा। टेनेंसी एक्ट में शक्तियां एसडीएम व डीसी को दी जा रही हैं। अधिकारियों का कोई कानूनी बैकग्राउंड नहीं होता है। वकीलों और जजों के मुकाबले उनकी कानूनी समझ भी कम होती है। वर्तमान में अदालत में 19 जज ऐसे है, जो रेंट कंट्रोलर (किराया नियंत्रक) हैं। ऐसे में अधिकारियों को यह शक्तियां दिया जाना गलत है। साल 2019 में भी यूटी टेनेंसी एक्ट के विरोध में बार एसोसिएशन की ओर से दस दिनों तक वर्क सस्पेंड रखा गया था।
क्या है यूटी टेनेंसी एक्ट
चंडीगढ़ प्रशासन ने मालिकों और किराएदारों के हितों में संतुलन और किराए को रेगुलेट करने के साथ किराएदार व मालिक के बीच विवाद को फास्ट ट्रैक आधार पर निपटाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार के मॉडल टेनेंसी एक्ट की तर्ज पर चंडीगढ़ यूनियन टेरिटरी टेनेंसी एक्ट 2019 का प्रारूप तैयार किया गया था।