पंजाब सरकार भविष्य में अवैध कॉलोनियां विकसित नहीं होने देगी। इसके लिए आगामी विधानसभा सत्र में नया कानून बनाने के लिए विधेयक लाया जाएगा और अवैध कॉलोनियां काटने वाले बिल्डरों-कॉलोनाइजरों से सख्ती के साथ निपटने के प्रावधान किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री भगवंत मान की ओर से सूबे में संपत्तियों की रजिस्ट्री के लिए एनओसी की शर्त खत्म करने संबंधी फैसले को लागू करने के उद्देश्य से बुलाई गई बैठक में यह फैसला लिया गया।
इस बैठक में संबंधित विभागों के उच्चाधिकारियों के अलावा कानूनी विशेषज्ञ और राजस्व मंत्री ब्रह्म शंकर जिंपा, स्थानीय निकाय मंत्री बलकार सिंह भी मौजूद थे। बैठक के दौरान फैसले को लागू करने के लिए विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। इस बात पर भी सहमति बनी कि एनओसी की शर्त हटाने को लेकर जो भी कानूनी अड़चनें संभावित हैं, उनका हल खोजने के बाद आगामी विधानसभा सत्र में एनओसी संशोधित कानून का प्रस्ताव पेश कर दिया जाए।
जानकारी के अनुसार, बैठक में एनओसी की शर्त खत्म करने से उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों, अड़चनों और संभावित धांधलियों पर भी चर्चा की गई। यह आशंका भी जताई गई कि अगर एनओसी की शर्त खत्म कर दी जाए तो संबंधी संपत्ति के सत्यापन में धांधली हो सकती है और इस फैसले के अदालती मामले बढ़ सकते हैं।
इस बात पर भी चर्चा हुई कि कलर कोडिंग स्टांप पेपरों से बिल्डरों-कॉलोनाइजरों पर लगाम कसी जा सकती है, लेकिन आम लोगों को इस फैसले से किस प्रकार जोड़ा जाएगा, ताकि संपत्ति के हस्तातंरण में कोई गड़बड़ी न हो। यह भी सवाल सामने आया कि आम लोगों के बीच संपत्ति की खरीद-फरोख्त के समय रजिस्ट्री के लिए कलर कोडिंग स्टांप पेपरों संबंधी शर्तें किसे पूरी करनी होंगी?
गमाडा और पूडा द्वारा बेचे जाने वाले प्लाटों आदि की रजिस्ट्री कैसे संभव होगी, क्योंकि अब तक यह संस्थान बेची जाने वाली संपत्तियों की एनओसी खुद जारी करते हैं, जिससे स्पष्ट रहता है कि संपत्ति पर कोई विवाद नहीं है। मुख्यमंत्री मान ने डेराबस्सी के भांखरपुर में एक कार्यक्रम के दौरान बताया था कि एनओसी की शर्त को खत्म करते हुए रजिस्ट्री के लिए कलर कोडिंग स्टांप पेपर सिस्टम लागू किया जाएगा।
पुरानी अवैध कॉलोनियों का कौन उठाए खर्च
बैठक के दौरान, इस मुद्दे पर भी चर्चा हुई कि एनओसी की शर्त हटाए जाने के कारण राज्य में पहले से बनीं अवैध कॉलोनियां स्वतः ही नियमित हो जाएंगी और भविष्य में कोई नई अवैध कॉलोनी नहीं बन सकेगी। लेकिन इस फैसले से नियमित होने वालीं अवैध कॉलोनियां आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं और नियमित होने की स्थिति में इनमें मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने के लिए खर्च कौन वहन करेगा? इन कॉलोनियों में आज भी बिजली, पानी, सीवरेज मुख्य समस्याएं हैं। मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान संबंधित विभागों के अधिकारियों को इस मुद्दे पर मंथन कर ठोस हल ढूंढने के निर्देश दिए।