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कानून विभाग का शोध: भारत का सांविधानिक ढांचा मजबूत लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं

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पटियाला की पंजाबी यूनिवर्सिटी के कानून विभाग में हाल ही में किए शोध में सामने आए नतीजे
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अमर उजाला ब्यूरो
पटियाला। भारत का सांविधानिक ढांचा मजबूत है लेकिन राजनीतिक प्रक्रिया और सांविधानिक नैतिकता के पालन के अभाव में इसकी प्रभावशीलता अकसर कमजोर पड़ जाती है। इसलिए चुनौतियां भी कम नहीं हैं। पंजाबी यूनिवर्सिटी के कानून विभाग में हाल ही में किए गए एक शोध अध्ययन से ये निष्कर्ष सामने आए हैं। शोध पर्यवेक्षक प्रोफेसर भूपिंदर सिंह विर्क के नेतृत्व में शोधकर्ता डॉ. करणवीर सिंह की ओर से किए गए अध्ययन में महत्वपूर्ण बिंदु सुझाए गए हैं।
डॉ. करणवीर सिंह ने कहा कि अध्ययन में चुनावी सुधार, संसदीय समितियों की भूमिका को मजबूत करने और अधिक रचनात्मक राजनीतिक संस्कृति को बढ़ावा देने जैसी सिफारिशों के साथ भारत के संसदीय लोकतंत्र के कामकाज को बेहतर बनाने के सुझाव दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि यह शोध कार्य विस्तृत और आलोचनात्मक ढंग से किया गया है, जो संविधान निर्माताओं द्वारा परिकल्पित भारत की संसदीय प्रणाली पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि यह अध्ययन ऐतिहासिक संदर्भ, संसदीय लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों और स्वतंत्रता के बाद इसके व्यावहारिक विकास की पड़ताल करता है।
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प्रो. भूपिंदर सिंह विर्क ने कहा कि इस अध्ययन ने भारत के संसदीय मॉडल की खूबियों को उजागर किया है। उन्होंने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव और मंत्रिपरिषद की लोकसभा के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी जैसे जवाबदेही प्रावधानों को हमारे संविधान की पहचान के रूप में चिह्नित करते हुए इसने पिछले दशकों में उभरी चुनौतियों और कमियों की भी आलोचनात्मक जांच की है। गठबंधन सरकारों के कारण राजनीतिक अस्थिरता, अध्यादेशों के बढ़ते प्रयोग और संसदीय बहस की कमजोरी जैसे मुद्दों पर विस्तार से विचार किया गया है।
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मूल्यांकन नीति-निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देने में सक्षम
उन्होंने कहा कि यह शोध केवल एक अकादमिक अभ्यास नहीं है बल्कि यह हमारे लोकतंत्र की कार्यप्रणाली के बारे में महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि यह मूल्यांकन अकादमिक विचार-विमर्श और नीति-निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देने में सक्षम है। वीसी डॉ. जगदीप सिंह ने अध्ययन की सराहना करते हुए कहा कि वर्तमान समय में प्रासंगिक ऐसे विषयों पर शोध पंजाबी यूनिवर्सिटी की सामाजिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक क्षेत्र में ईमानदारी, निष्ठा और योग्यता के साथ किया गया शोध कार्य आगे चलकर नीति-निर्माण का आधार बनता है। भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को मजबूत करने के लिए नए दृष्टिकोण प्रस्तुत करने की दृष्टि से ऐसे शोध कार्यों का विशेष महत्व है।
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