प्रशासन ने पूरे शहर की लिडार टेेक्नोलॉजी से रियल टाइम फोटोग्रॉफी कराने की तैयारी कर ली है। इसके लिए जारी टेंडर को सोमवार खोला गया, लेकिन एक ही एजेंसी ने इसके लिए आवेदन किया है। जिस कारण इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट फिर से इसका टेंडर जारी करेगा।
देश के चुनिंदा शहरों ने ही लिडार टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया है। इस टेेक्नोलॉजी में पूरे शहर की रियल टाइम फोटोग्रॉफी की जाएगी। जो ज्योग्रॉफिक इंफोर्मेशन सिस्टम (जीआईएस) की मैपिंग में भी काम आएगी। सोमवार को एडवाइजर परिमल राय ने अधिकारियों की मीटिंग बुलाकर लिडार तकनीक पर चर्चा भी की।
क्या है लिडार तकनीक
एयरबोर्न और टेरेस्टेरियल लिडार के दो प्रकार होते हैं। एयरबोर्न में प्लेन से लेजर स्कैनिंग की मदद से 3डी इमेज ली जाती है। इसमें बिल्डिंग, सड़क और अन्य चीजों की रियल टाइम इमेज ली जा सकती है। डिजिटल मूल्यांकन में एयरबोर्न को विस्तृत और सटीक मैथड माना जाता है। वहीं टेरेस्टेरियल लिडार में जमीन पर किसी बस के माध्यम से लेजर स्कैनिंग से रिफ्लेक्शन कर फोटो ली जाती हैं।