अब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष व समाजसेवी संजय टंडन पीजीआई के नेहरू हास्पिटल के बाहर मरीजों के लिए लंगर की जिम्मेदारी को संभालेंगे।
अब तक इस जिम्मेदारी को संभाल रहे जगदीश लाल आहूजा की उम्र काफी हो चली है और उनके पास इतने रुपये भी नहीं हैं कि वह लंगर को ज्यादा समय तक चालू रख सकें। वह चाहते थे कि यूटी प्रशासन उनकी इस काम में मदद करे, ताकि लंगर चलता रहे, लेकिन यूटी प्रशासन की ओर से उन्हें कोई मदद नहीं मिली।
जब बात संजय टंडन के पास पहुंची तो वह इस जिम्मेदारी को उठाने के लिए तैयार हो गए। शनिवार को टंडन ने बताया कि वह इस बारे में 15 जनवरी को जगदीश लाल आहूजा से बात करेंगे और जब से वह अपनी जिम्मेदारी छोड़ना चाहेंगे, उसी दिन से लंगर की जिम्मेदारी संभाल लेंगे।
बिक चुकी थी आधा से ज्यादा प्रॉपर्टी
जगदीश लाल आहूजा 15 साल से नेहरू हास्पिटल के बाहर लंगर चला रहे हैं। जो लोग उन्हें जानते हैं, वे कहते हैं कि आहूजा ने एक से डेढ़ हजार लोगों को गोद ले रखा है। गरीब बच्चों और मरीजों के लिए वे भीष्म पितामह से कम नहीं हैं। लंगर के लिए आज तक किसी से पैसे नहीं मांगे। भूखों का पेट भरने के लिए एक-एक करके करोड़ों रुपये की प्रापर्टी बेच चुके हैं।
आहूजा बताते हैं कि अब उनके लिए लंगर चलाना मुश्किल हो गया है। उनके पास रुपये भी नहीं हैं और न ही उसे संभालने का दमखम। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति या सोसाइटी उनके लंगर को संभालना चाहता है तो वह इस लंगर को उसे सौंप सकते हैं। यदि कोई आगे नहीं आया तो वह जब तक जिंदा हैं, तब तक पीजीआई के बाहर लंगर चलता रहेगा।
आहूजा को पद्मश्री की सिफारिश
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय टंडन ने बताया कि हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने भारत सरकार से जगदीश लाल आहूजा को पद्म श्री देने की सिफारिश की है। टंडन की दलील दी है कि शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा, जो इतने सालों से लंगर चला रहा हो।
वहीं जगदीश लाल पाहुजा का कहना है कि मैं 21 जनवरी से अपना लंगर बंद कर रहा हूं। मुझसे चार से पांच लोगों ने लंगर चलाने का आग्रह किया है। अभी यह तय नहीं हुआ कि किसे दिया जाए।