चंडीगढ़। लंगर बाबा के नाम से मशहूर पद्मश्री जगदीश लाल आहूजा के जाने से हर कोई गमगीन है। उनका पार्थिव शरीर सेक्टर- 23 के घर के लॉन में रखा हुआ था और सबकी आंखों में आंसू थे। पत्नी निर्मल आहूजा का रो-रोकर बुरा हाल था। परिवार के सदस्यों ने उनके पार्थिव शरीर पर कपड़े रखे। जब परिवार के सदस्य अंतिम यात्रा के लिए सेक्टर-25 के श्मशानघाट के लिए गाड़ी पर जाने लगे तो उनकी पत्नी ने कहा- ‘मैं दूसरी गाड़ी में नहीं जाऊंगी। मैं तो उनके साथ ही चलूंगी।’ इसके बाद वह अपने पति की पार्थिव शरीर के पास ही बैठीं। उनकी बेटियां और परिवार के सदस्य भी साथ रहे। पद्मश्री के चाहने वाले भी वहां पर पहुंचे। पास पड़ोस के लोग भी धीरज बंधाने के लिए पहुंचे। बेटा गिरीश आहूजा, बेटियां शिवानी और रीनू और दामाद अतुल दुग्गल सहित उनके परिवार के अन्य सदस्य पहुंचे थे।
हर रोज मुझे फोन करते थे पापाजी : चंद्र भूषण
सेक्टर- 26 मंडी के दुकानदार चंद्र भूषण ने बताया कि उनका और जगदीश लाल आहुजा का 40 वर्षों से साथ था। हर रोज फोन करते थे। कम से कम आधा घंटा बात करते थे। रविवार की शाम को उन्होंने बात करते हुए कहा कि तबीयत ठीक नहीं है। इसलिए दो मिनट ही बात हुई। चंद्र भूषण ने बताया कि मंडी में आहूजा की मंडी में जगदीश फुड एजेंसी की आढ़त की दुकान थी। उनके दुकान से ही फल और सब्जी खरीदकर बेचते थे। वे मुझे बेटा कहकर पुकारते थे। चंद्रभूषण ने बताया कि उनके चले जाने से एक युग का अंत हो गया। पीजीआई में लंगर लगाने से पहले सेक्टर- 26 की मंडी में लंगर चलाते थे। वे स्वयं ही पीजीआई में लंगर के लिए खाना और पानी लेकर जाते थे। उन्हें सभी लोग पापाजी कहकर पुकारते थे।