चंडीगढ। हाल ही में अभिनेत्री हिना खान ने सोशल मीडिया एकांउट पर अपने स्तन कैंसर की तीसरी स्टेज के बारे में लोगों को जानकारी दी। अभिनेत्री ने पिछले दिनों अपने पहले कीमोथेरेपी के बारे में बताया और उसके बाद अपने हेयर कट का वीडियो भी साथ साझा किया। इसे लेकर एक बार फिर इस मर्ज के प्रति जागरूकता के अभाव की स्थिति सामने आई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस बीमारी के लक्षण समय रहते सामने न आने से इसे पहचानना बेहद मुश्किल है। इसलिए मानक के अनुसार स्तन कैंसर से संबंधित जांच बेहद जरूरी है। स्तन कैंसर के प्रति जागरूकता फैलाने का काम कर रही रानी ब्रेस्ट कैंसर एनजीओ संस्था की स्थापक बिट्टू संधू का कहना है कि स्तन कैंसर न सिर्फ एक शारीरिक के साथ ही एक मानसिक रोग भी है। संधू का कहना है कि उन्होंने 1984 में बड़ी बहन को स्तन कैंसर के कारण खोया था। समाज में आज भी महिलाएं स्तन कैंसर के बारे में जागरूक नहीं है। जो महिलाएं जागरूक भी हैं वो इसकी जांच कराने के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं हैं। इससे लड़ने के लिए महिलाओं को मानसिक तौर पर मजबूत होना आवश्यक है। बिट्टू संधू ने कहा कि उनकी एनजीओ की मदद से नि:शुल्क मैमोग्राफी जांच कराई जाती है।
खुद भी कर सकते हैं जांच : इडियन सोसायटी ऑफ असिस्टेट रिप्रोडक्शन की चंडीगढ़ शाखा की अध्यक्ष डॉ. निर्मल भसीन ने बताया कि स्तन कैंसर एक आनुवांशिक बीमारी भी है। उन्होंने बताया कि अगर परिवार में पहले से कैंसर की हिस्ट्री हो तो यह संभव है कि एक उम्र के बाद इसके लक्षण सामने आए। इसलिए ऐसी स्थिति में 40 साल से पहले मैमोग्राफी कराकर अपनी सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि स्तन कैंसर से बचाव में जागरूकता के साथ-साथ जानकारी भी महत्व रखता है। इसकी जांच खुद भी की जा सकती है।