राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य का कहना है कि देश की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए 12 में से 8 कुंभों और 48 कोस के विलुप्त तीर्थों की खोज को आगे बढ़ाना होगा। इसके जरिए कुंभ और तीर्थों के इतिहास को आमजन के समक्ष रखा जाना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां देश की प्राचीन संस्कृति को आत्मसात कर सकें।
राज्यपाल सोमवार को ब्रह्मसरोवर पुरुषोत्तमपुरा बाग में अखिल भारतीय सर्वमंगला कुंभ सेवा समिति एवं कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के तत्वाधान में आयोजित कुरुक्षेत्र कुंभ-2018 के उद्घाटन सत्र में बतौर मुख्यातिथि बोल रहे थे। इससे पहले राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य, केंद्रीय राज्यमंत्री अश्विनी कुमार चौबे, सेवा समिति के संयोजक स्वामी चिदात्मन महाराज, स्वामी ज्ञानानंद, लाडवा के विधायक पवन सैनी, कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के कुलपति कैलाश चंद्र शर्मा, लोकसभा टीवी के संपादक एवं सेवा समिति के महासचिव श्याम किशोर, राज्यपाल के सचिव विजय दहिया, रामधारी दिनकर, स्मृति समिति के अध्यक्ष नीरज कुमार, कौशल किशोर, रत्नचंद सरदाना, संस्कृति विश्वविद्यालय मंदूड़ी के कुलपति श्रेयांश द्विवेदी, नवीन पुरुषोत्तम ने शंखनाद और मंत्रोच्चारण के बीच दीप प्रज्ज्वलित कर कुरुक्षेत्र कुंभ का शुभारंभ किया।