पंजाब सरकार की ओर से पिछले कुछ सप्ताह से राज्य स्तर पर नशा विरोधी अभियान चलाया जा रहा है। मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल खुद इसके अध्यक्ष हैं। अभियान के तहत हर कदम पर निगाह रखने के लिए सरकार प्रत्येक जिले में कमेटी का गठन कर रही है।
नशेड़ियों को मुफ्त इलाज के साथ-साथ अन्य सुविधाएं देने और राज्य भर में लोगों को जागरूक करने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। लेकिन यह ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। अब बहुत देर हो चुकी है।
वास्तव में यह अभियान महज पाखंड है। एक ऐसी समस्या का समाधान करने का नाटक है जो सत्ता में बैठे लोगों की ही देन है और अब वही सत्ताधारी लोग खुद को पंजाब के नशेड़ी समाज का रक्षक बताने का ढोंग कर रहे हैं।
प्रदेश के कई मंत्री और नेता जुड़े रहे नशा करोबार से
लंबे समय से ही यह बात सामने आती रही है और मीडिया में बार-बार आने वाली खबरें भी यह पुष्टि करती रही हैं कि प्रदेश के राजनेता, कई मंत्री और उनके परिवार के लोग अरबों के इस कारोबार में जुड़े रहे लेकिन अब तक उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।
मई 2014 में लोकसभा चुनाव के दौरान निर्वाचन आयोग ने देश भर में कुल एक लाख 85 हजार किलोग्राम ड्रग्स जब्त करने का खुलासा किया था। इसमें से 1.39 लाख किलोग्राम यानी 75 फीसदी ड्रग्स केवल पंजाब से जब्त हुईं।
हालांकि पंजाब की राजनीति में ड्रग्स और इसके कारोबार से मिलने वाली मोटी रकम की भूमिका बताने के लिए कई किस्से-कहानियां सुनने को मिलती हैं पर यह अकेला आंकड़ा इस बात की पुष्टि करने के लिए काफी है कि ड्रग्स के कारोबार में पंजाब की खतरनाक राजनीति किस हद तक संलिप्त है और इससे किस कदर राज्य की आबादी को अपंग बनाया जा रहा है।
पिछले कुछ समय से पंजाब में नशे की बाढ़
पिछले कुछ दशकों में पंजाब में जैसे नशे की बाढ़ आ गई है। मानवीय और सामाजिक स्तर पर यह किसी अनर्थ या त्रासदी से कम नहीं है। 2009 में पंजाब सरकार द्वारा हाईकोर्ट के समक्ष पेश की गई एक रिपोर्ट के अनुसार पंजाब के 75 प्रतिशत युवा, कॉलेज में पढ़ने वाले हर तीन में से एक छात्र और करीब 65 फीसदी परिवार नशे की चपेट में हैं।
राज्य की सभी जेलों में बंद करीब तीस प्रतिशत कैदियों की नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटांसिस (एनडीपीएस) एक्ट के तहत गिरफ्तारी हुई है लेकिन हालात लगातार बदतर होते जा रहे हैं। पंजाब पुलिस में कई ऐसे दागी हैं जिनकी मिलीभगत से तस्करों का धंधा रफ्तार पकड़ रहा है।
ऐसे में पुलिस नेतृत्व को अपने ही विभाग में नशा विरोधी अभियान चलाने को मजबूर होना पड़ा। नशे के कारोबार में लिप्त कम से कम 12 पुलिस कर्मियों को बर्खास्त किया जा चुका है और 62 के खिलाफ फिलहाल जांच जारी है।
पंजाब में करीब 7 से 60 अरब का नशा कारोबार
हालांकि पंजाब में ड्रग्स के कारोबार का एकदम सही और निष्पक्ष आंकड़ा मिलना मुश्किल है, फिर भी राज्य में 7 अरब से 60 अरब रुपये तक के कारोबार का अनुमान है। ड्रग्स बरामदगी के आंकड़े जिस तरह से विकराल हो रहे हैं, उससे लगता है कि आने वाले समय में हम समस्या का विस्फोट होते देखेंगे।
वर्ष 2011 में 100 किलोग्राम हेरोइन जब्त की गई थी लेकिन यह आंकड़ा 2012 में 278 किलोग्राम और वर्ष 2013 में 416 किलोग्राम तक पहुंच गया। इस साल 18 जून तक 302 किलोग्राम हेरोइन जब्त की जा चुकी है। हेरोइन के अलावा अफीम, भुक्की, स्मैक और मेटमफेटामाइन (आइस) जैसी ड्रग्स भी जब्त की गई हैं।
जब्त की गई ड्रग्स और संलिप्त लोगों की गिरफ्तारियां, पंजाब पुलिस द्वारा नशे के खिलाफ किए जा रहे प्रयासों का पुख्ता सबूत हैं। वर्ष 2003 से लेकर 2013 तक प्रदेश में 16,821 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है जबकि इस साल 18 जून तक 4,505 लोग गिरफ्तार हुए है। लेकिन जैसा कि मैं कह चुका हूं, समस्या बहुत गंभीर है और सरकार ने बहुत देर से, बहुत कम कार्रवाई की है।