कैशलेस के लिए रोजाना मीटिंग का दौर चल रहा है। लेकिन जमीनी स्तर पर लोग अभी भी इसे अपनाने से कतरा रहे हैं। खासकर छोटे दुकानदार और रेहड़ी-फड़ी वाले इससे बच रहे हैं।
कैशलेस अपनाने के बारे में जब सेक्टर-17 और 9 में दो जूस की रेहड़ी वालों से बात की गई तो उन्होंने कहा कि वह कैशलेस नहीं अपनाएंगे। कारण पूछा तो बताया कि उन्हें इसके लिए सेल पर 2 प्रतिशत टैक्स देना होगा।
पहले ही बहुत से खर्चों के बाद कमाई कम होती है ऊपर से 2 प्रतिशत टैक्स नुकसान बढ़ा देगा। टैक्स लगने की बात उन्हें मंडी में सामान देने वाले व्यापारी ने बताई है। ऐसे में वह स्वैप मशीन लगावा भी लेंगे तो उन पर टैक्स की मार अलग से पड़ेगी।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इन लोगों को कैशलेस व्यवस्था से कैसे जोड़ता है। हालांकि लोगों की जागरूकता के लिए प्रशासन पब्लिक कैंप भी लगाने जा रहा है। लेकिन अभी इनकी तैयारियों पर मीटिंग का दौर ही खत्म नहीं हो रहा है। डीसी ऑफिस में रोजाना कैशलेस पर एक के बाद एक मीटिंग हो रही हैं। अधिकारियों का पूरा दिन इन मीटिंग में ही खप रहा है।