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जानिए, इबोला के संक्रमण से कैसे करें बचाव?

Sat, 01 Nov 2014 01:42 PM IST
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
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मरीज के संपर्क में आने से इबोला संक्रमण होता है मरीज के खून, पसीने के संपर्क से और छूने से ये फैलता है। महामारी वाले इलाके के पशुओं के संपर्क से भी ये फैलता है।
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इबोला संक्रमण के लक्षण
इबोला के संक्रमण से जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द, त्वचा का पीला पड़ जाना, बाल झड़ना, तेज रोशनी से आंखों पर असर, बहुत अधिक रोशनी बर्दाश्त नहीं कर पाना, आंखों से जरूरत से ज्यादा पानी आना तेज बुखार आना। कालरा, डायरिया, टायफॉयड जैसे लक्षण नजर आना है।

कैसे करें बचाव
इबोला संक्रमण का कोई तय इलाज नहीं है, लेकिन मरीज को बिल्कुल अलग जगह पर रख कर उसका इलाज किया जाता है, ताकि संक्रमण बाकी जगह न फैले। मरीज में पानी की कमी नहीं होने दी जाती। उसके शरीर में ऑक्सीजन स्तर और ब्लड प्रेशर को सामान्य रखने की कोशिश की जाती है।
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इबोला के लिए चंडीगढ़ स्वास्‍थ्य विभाग तैयार

इबोला से निपटने के लिए चंडीगढ़ हेल्थ प्रशासन ने पूरी तैयारी कर ली है। इसके लिए लगातार जरूरी कदम और ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाए जा रहे हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग की ओर मिली जानकारी के मुताबिक सभी राज्यों को पर्सनल प्रोटेक्शन एक्युपमेंट डिस्पैच की जा रही हैं।

चंडीगढ़ को भी करीब 100 के लगभग पर्सनल प्रोटेक्शन किट भेजी गईं हैं, जो जल्द ही स्वास्थ्य विभाग को सौंप दी जाएगी। यह एक विशेष प्रकार की ड्रेस है, जो पीड़ित व्यक्ति के इलाज के दौरान पहनी जाती हैं। इसका काम संक्रमण को रोकना होता है।

दावा है कि इनके पहनने से इबोला का वायरस प्रवेश नहीं करता। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक इबोला का सबसे ज्यादा खतरा इलाज करने वाली टीम को होता है। इसलिए यह ड्रेस उन्हें मुहैया करवाई जाएगी। भारत में फिलहाल इबोला का कोई केस सामने नहीं आया है।
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डाक्टरों को दी गई ट्रेनिंग

इबोला से निपटने के लिए जीएमएसएच 16 के डाक्टरों व पैरामेडिकल स्टाफ को ट्रेनिंग दी जा चुकी है। उन्होंने बताया कि गया है कि यदि कोई पीड़ित केस आता है उसका सैंपल व इलाज कैसे करना है।

यह संक्रमण दूसरे लोगों में न फैले इसके लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए। इसके अलावा रैपिड रिस्पांस टीम का भी गठन किया जा चुका है।

स्वास्थ्य विभाग की ओर से हॉस्पिटलों में आइसोलेटेड वार्ड बनाने के भी निर्देश जारी किए जा चुके हैं। इसके अलावा केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग की ओर से बराबर चंडीगढ़ हेल्थ प्रशासन को दिशा-निर्देश भेजे जा रहे हैं।

सिर्फ दिल्ली व पुणे में सैंपलों की जांच
इबोला के सैंपलों की जांचने की क्षमता भारत में सिर्फ दो लैब के पास है। पहला दिल्ली स्थित नेशनल सेंटर फार डिजीज कंट्रोल व पुणे के नेशनल इंस्टीट्यूट आफ वाइयरोलॉजी में ही इबोला के सैंपलों की जांच हो सकेगी। हालांकि पीजीआई में लैब स्थापित करने की दिशा में काम चल रहा है।
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