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साइलेंट किलर है हाइपरटेंशन, जानिए कैसे बचें इससे

Mon, 19 May 2014 01:19 PM IST
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
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तेज रफ्तार जिंदगी में अव्यवस्थित जीवनशैली हाइपरटेंशन को बढ़ावा दे रही है। कई विशेषज्ञ इसे साइलेंट किलर भी कहते हैं। इससे किडनी, हार्ट, ब्रेन संबंधित बीमारियों की आशंका रहती है।
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मैक्स हास्पिटल मोहाली के विशेषज्ञों के सर्वे के मुताबिक ट्राइसिटी के 45 प्रतिशत लोग हाइपरटेंशन से पीड़ित हैं जबकि 30 वर्ष में चंडीगढ़ में हाइपरटेंशन के मामले दोगुने हो गए हैं।

यह काफी चिंताजनक है। इसकी चपेट में अब बच्चे भी आ रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक यदि कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो इस टेंशन से मुक्त हो सकते हैं।

ये होता है हाइपरटेंशन

हाइपरटेंशन या हाई ब्लडप्रेशर में धमनियों में रक्त का दबाव बढ़ जाता है। इससे हृदय को रक्त नलिकाओं में रक्त के संचार के लिए सामान्य से ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इसमें धमनियों में खून का प्रवाह बढ़ता है, जिससे दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।

शरीर में रक्त संचार भी सामान्य से ज्यादा होता है। हाइ बीपी के बने रहने से दिल को अतिरिक्त दबाव में रहना पड़ता है। धीरे-धीरे दिल की मांसपेशियां मोटी होने लगती हैं। ऐसी स्थिति में शरीर को अधिक ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है।

हाइपरटेंशन कोई जानलेवा बीमारी नही है। मगर यह बीमारी लंबे समय तक रहे तो शरीर के अन्य अंगों के डैमेज होने का खतरा हो सकता है। यह बीमारी अधिक तनाव की देन है।

कई प्रकार के हाइपरटेंशन

व्हाइट कोट हाइपरटेंशन: इसमें बीपी बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। मरीज की स्थिति अत्यधिक नाजुक होती है। ऐसे मरीजों को चिकित्सक की देखरेख में रहना पड़ता है।

बॉर्डरलाइन हाइपरटेंशन: इसमें बीपी अधिक नहीं होता मगर दिल और किडनी अत्यधिक प्रभावित होते हैं।

पार्शियल हाइपरटेंशन: इसे एपिसोडिक हाइपरटेंशन भी कहते हैं। बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति को दिन में किसी खास वक्त तनाव या बेचैनी की समस्या होती है और अचानक बीपी बढ़ जाता है।

प्रेग्नेंसी में हाइपरटेंशन: प्रेग्नेंसी में इसके मामले 8-10 ही देखने को मिलते हैं। यदि छह घंटे तक हाइपरटेंशन की माप 140/90 से अधिक रहती है तो इसे हाइपरटेंशन समझा जाता है। प्रेग्नेंसी में सिरदर्द, उल्टी, पेट में दर्द आदि इसके प्रमुख लक्षण होते हैं। यदि बीमारी की रोकथाम समय रहते नहीं की गई तो गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है। महिलाओं को प्रेग्नेंसी में ब्लड प्रेशर की नियमित जांच करानी चाहिए।

हाइपरटेंशन के लक्षण

1. चिड़चिड़ापन ज्यादा होना
2. कुछ दिनों से मूड में बदलाव और बेचैनी महसूस होना
3. अक्सर सिरदर्द रहना
4. घबराहट होना, समय पर नींद न आना

हाइपरटेंशन की प्रमुख पांच भ्रांतियां

सिरदर्द: वैज्ञानिक शोधकर्ताओं के अनुसार सामान्य बीपी वाले लोगों के मुकाबले हाई बीपी के मरीजों को सिरदर्द के मामले काफी कम होते हैं।
नाक से खून: ये कई सारे आंतरिक और बाहरी कारकों पर निर्भर करता है।
आंखों में रक्त के निशान: आंखों में खून के निशान सिर्फ हाई बीपी के कारण ही नहीं होते, बल्कि ऑप्टिक नर्व सिस्टम में क्षति के चलते भी ऐसा हो सकता है।
चेहरे में बदलाव: हाई बीपी से चेहरे में खिंचाव, लालिमा आदि बढ़ सकती है। पर यह हर केस में जरूरी नहीं है।
थकान: हाई बीपी में शरीर निढाल हो सकता है।कई बार सर्वाइकल स्पोंडोलायसिस के कारण भी ऐसा हो सकता है। बहरहाल अचानक थकान या चलने में परेशानी स्ट्रोक के कारण भी हो सकती है।

कब और कितने अंतराल में करवाएं जांच

हर 5 में से एक व्यक्ति का ब्लडप्रेशर असामान्य
यह एक बहुत ही सामान्य टेस्ट होता है। नियमित रूप से ब्लडप्रेशर की जांच शारीरिक स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है। हर पांच में से एक व्यक्ति का ब्लडप्रेशर असामान्य होता है। अगर आपके ब्लड का प्रेशर 140-90 से अधिक या कम है तो इससे आपके दिल पर दबाव पड़ता है और हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक और किडनी फेल होने की आशंका बढ़ जाती है।

इसकी किसी भी उम्र में जांच करवा सकते हैं। वैसे 15 साल की उम्र में शुरू कर दें तो ज्यादा अच्छा होगा। आमतौर पर विशेषज्ञ 20 साल की उम्र में बीपी की जांच करवाने की सलाह देते हैं। साल में एक बार जरूर करवाएं। यदि आपका ब्लडप्रेशर सामान्य से कम या अधिक हो तो हर छह महीने में जांच करवाएं।

कब बढ़ता है जोखिम

उम्र: उम्र बढ़ने के साथ हाई ब्लडप्रेशर का खतरा बढ़ता जाता है। 30 साल की उम्र पार कर चुके पुरुषों में और मेनोपॉज के स्तर को पहुंच चुकी महिलाओं में हाई ब्लडप्रेशर होने की आशंका अधिक होती है।
भार: आपका भार जितना ज्यादा होगा, आपके शरीर के ऊतकों को उतनी ही अधिक मात्रा में ऑक्सीजन और रक्त की आवश्यकता होगी। जितना ज्यादा आपके शरीर की धमनियों से रक्त का संचार होगा, उतना ही उनकी दीवारों पर दबाव अधिक पड़ेगा।
एक्सरसाइज न करना:  जो लोग निष्क्रिय होते हैं, उनके दिल की धड़कनें ज्यादा तेज होती हैं। आपके दिल की धड़कनें जितनी तेज होंगी, हर संकुचन पर आपके हृदय को अधिक काम करना पड़ेगा और आपकी धमनियों पर उतना दबाव पड़ेगा।
तंबाकू का सेवन: यह न केवल अस्थायी रूप से ब्लडप्रेशर को बढ़ा देता है, बल्कि तंबाकू में मौजूद रसायन धमनियों की अंदरूनी परत को भी नष्ट कर देते हैं।
एल्कोहल की अधिक मात्रा: अधिक मात्रा में शराब का सेवन ब्लडप्रेशर को बढ़ा देता है।
तनाव: तनाव भी ब्लडप्रेशर को अस्थायी रूप से बढ़ा देता है।

ये आदते भी बढ़ाती हैं हाइपरटेंशन

भोजन में सोडियम की अधिकता या पोटेशियम की कमी रक्तचाप को बढ़ा देती है। हालांकि इस बारे में एक राय नहीं है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि आपकी डाइट में विटामिन डी की मात्रा काफी कम होगी तो हाई ब्लडप्रेशर की आशंका बढ़ जाएगी।

गर्भनिरोधक गोलियां, दर्द निवारक गोलियों का अधिक मात्रा में सेवन भी ब्लडप्रेशर को बढ़ाने का काम करती हैं। इसके अलावा ड्रग्स जैसे कोकीन आदि का सेवन भी ब्लडप्रेशर को बढ़ा देता है।

ये कदम उठाएं तो बचे रहेंगे

1. बीमारियों के उपचार से ब्लडप्रेशर को सामान्य किया जा सकता है।
2. शारीरिक रूप से सक्रिय रहे।
3. फल और सब्जियों का सेवन करे
4. अपने भोजन में नमक की मात्रा कम रखें।
5. घर का बना सादा खाना खाएं, जंक फूड और बाहर के खाने से बचे।
6. सुबह के समय एक्सरसाइज जरूर करे
7. यदि तनाव में हैं तो अपना मनपसंद काम करे
8. अपना मनपसंद संगीत भी सुन सकते हैं
9. पूरी नींद लें
10. पौष्टिक भोजन का सेवन करे
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ये कहना है डॉक्टरों का

140/90 से बीपी कम होना चाहिए। सबसे पहले स्ट्रेस को कम करे। नमक यदि ज्यादा खाते हैं तो उसे भी कम करें। सुबह व्यायाम करें।
डा. अमित गुप्ता, मैक्स मोहाली

लगातार हाइपरटेंशन की वजह से ब्रेन स्टोक का खतरा रहता है। ब्रेन स्ट्रोक से बचना है तो हाइपरटेंशन पर नियंत्रण रखना होगा। सबसे ज्यादा ब्रेन स्ट्रोक हाइपरटेंशन की वजह से होता है।
डा. धीरज खुराना, एडिशनल प्रोफेसर, न्यूरोलॉजी, चंडीगढ़

यदि किसी व्यक्ति को लगातार हाइपरटेंशन रहता है तो उसकी किडनी फेल होने का रिस्क बढ़ जाता है।
प्रोफेसर केएल गुप्ता, नेफ्रोलॉजी विभाग, पीजीआई चंडीगढ़
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