अगर आपके हाथ-पैर पांच मिनट के लिए सुन्न पड़ जाएं या फिर मुंह टेढ़ा होने लगे तो जल्द से जल्द किसी अच्छे न्यूरोलॉजिस्ट से चेकअप कराइए। यदि लापरवाही बरती तो आप ब्रेन स्ट्रोक के शिकार हो सकते हैं।
न्यूरोलॉजिस्ट का कहना है कि जिन लोगों में इस प्रकार के लक्षण आते हैं, उनमें एक हफ्ते के भीतर ब्रेन स्ट्रोक आने के चांस ज्यादा होते हैं।
चंडीगढ़ में इंडियन स्ट्रोक एसोसिएशन की आयोजित कांफ्रेंस के अंतिम दिन आए डॉक्टरों ने बताया कि जब इस तरह के लक्षण आते हैं तो इसे ट्रांससिएंट स्कीमिक अटैक कहते हैं।
इसमें ब्लड सप्लाई की गति धीमी हो जाती है और पांच मिनट से लेकर आधे घंटे के भीतर ठीक भी हो जाता है। ऐसे में मरीज को लगता है कि रुटीन में कुछ हुआ होगा, लेकिन इसे गंभीरता से लेनी चाहिए।
इनमें ज्यादा रिस्क फैक्टर
डॉक्टरों ने बताया कि स्कीमिक अटैक आने के सबसे ज्यादा चांस अनकंट्रोल डायबिटीज पेशेंट, हाइपरटेंशन, स्मोकिंग और हाई कोलेस्ट्राल पेशेंट को आने की संभावना रहती है। इसलिए ऐसे पेशेंट को ज्यादा सतर्कता बरतने की जरूरत है।
विटामिन डी और बी-12 की कमी से भी स्ट्रोक
विटामिन डी और बी-12 की कमी से भी ब्रेन स्ट्रोक आ सकता है। विटामिन की कमी से मेटाबोलिक सिंड्रोम प्रभावित होता है और स्ट्रोक आने की प्रबल संभावना रहती है।
ऐसे कई केस सामने आ चुके हैं, जिनमें कोई और कारण नहीं, बल्कि विटामिन की कमी देखी गई। आजकल लोग एसी में रहते हैं। धूप से बचते रहते हैं और उनमें विटामिन डी की कमी हो जाती है।
यदि लोग ऐसी स्थिति में रह रहे हैं तो उन्हें महीने में एक बार जरूर धूप के सामने बैठना चाहिए या फिर वे विटामिन डी की दवा लें, क्योंकि विटामिन डी का कोई अन्य स्रोत नहीं है।
ऐसे करें ब्रेन स्ट्रोक बचाव
ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करें।कोलेस्ट्राल को कंट्रोल करे।मोटापा, शुगर को काबू करें।स्मोकिंग और शराब छोड़ दें।जंक फूड खाना छोड़ें।