दायरे से बढ़कर उम्मीद और जल्दबाजी में लिया गया फैसला यानी डिप्रेशन को दावत...। आजकल लिव इन रिलेशनशिप का क्रेज बढ़ने लगा है। पहले प्यार, फिर एक-दूसरे से इमोशनली जुड़ाव और फिर ब्रेकअप, डिप्रेशन जैसी बीमारी के कारण बन रहे हैं।
यही वजह है कि ज्यादातर युवतियां ही डिप्रेशन का शिकार हो रही हैं। दो माह में सेक्टर-6 के जनरल अस्पताल में ऐसे 15 डिप्रेशन के मामले आए हैं। इसके अलावा कुछ ऐसे केस भी हैं, जिनमें लिव इन रिलेशनशिप की वजह से उनके पैरेंट्स भी डिप्रेशन का शिकार हुए हैं।
इंटर कास्ट मैरेज में अड़ंगा भी बन रहा कारण
जनरल अस्पताल में लिव इन रिलेशनशिप की वजह से अब तक डिप्रेशन के जितने मामले मनोरोग विशेषज्ञ के पास आए हैं, उनमें सबसे ज्यादा केस इंटर कास्ट मैरिज नहीं होने से जुड़े हैं। युवक-युवती पहले लिव इन में रहे, पर शादी की बात आने पर पैरेंट्स के विरोध के कारण लड़के ने इनकार कर दिया और लड़की डिप्रेशन में चली गई।
ऐसे केस आए अस्पताल में
पहला केस
दो दिन पहले अस्पताल में डिप्रेशन का एक केस आया था। एक युवक और युवती तीन साल से एक साथ जॉब करते थे और दो साल से लिव इन रिलेशनशिप में भी थे। जब शादी की बात बढ़ी तो लड़के ने यह कहकर इनकार कर दिया कि उसके पैरेंट्स शादी के लिए तैयार नहीं हैं और लड़की से बातचीत भी बंद कर दी। लड़की डिप्रेशन में चली गई।
दूसरा केस
चार साल से लिव इन रिलेशनशिप में थे। लड़के ने अपनी मां को भी इसकी जानकारी दी थी। शादी की बात चली तो इंटर कास्ट होने की वजह से लड़के के पिता ने इनकार कर दिया, क्योंकि लड़की यूपी के दूसरे कास्ट की थी और लड़का जाट परिवार का था।
तीसरा केस
फेसबुक के जरिए बातचीत बढ़ी, फिर प्यार हुआ और लिव इन रिलेशनशिप में रहने लगे। लड़का हैंडीकैप्ड था। जब बात शादी तक पहुंची तो लड़की के पिता ने लड़के को देखने के बाद शादी से इनकार कर दिया। लड़की ने पिता को बिना बताए ही शादी ली और इसके बाद लड़की के पिता डिप्रेशन में चले गए।
डिप्रेशन के लक्षण
किसी काम में दिल नहीं लगना
- बार-बार पुराने खयाल आना
- भूख नहीं लगना
- उदास रहना
- नींद नहीं आना
- गुस्सा आना
- चिड़चिड़ापन
डॉक्टर के टिप्स
- लिव इन रिलेशनशिप के बारे में अभिभावकों को जरूर बताना चाहिए
- यदि आप लिव इन रिलेशनशिप में हैं तो अगले किसी भी निर्णय के लिए तैयार रहें
- हर हाल में अपने स्वाभिमान को मजबूत रखें
लिव इन रिलेशनशिप की वजह से दो माह में डिप्रेशन के करीब 15 मामले सामने आए हैं। इनमें सबसे ज्यादा लड़कियों की संख्या है। ज्यादातर मामले ऐसे हैं, जिनमें इंटर कास्ट मैरेज नहीं होने की वजह से युवक या युवती डिप्रेशन के शिकार हो जाते हैं।
- डॉ. राजीव त्रेहन, मनोरोग विशेषज्ञ जनरल अस्पताल सेक्टर 6 पंचकूला।