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Gurdaspur: कांग्रेस के सुखजिंदर रंधावा ने लगाई भाजपा के गढ़ में सेंध, पहली बार चढ़ेंगे संसद की सीढ़ी

Thu, 06 Jun 2024 04:15 PM IST
निवेदिता वर्मा मनन सैनी, संवाद न्यूज एजेंसी, गुरदासपुर (पंजाब)

सार

पिछले 24 साल में गुरदासपुर लोकसभा सीट से चार बार भाजपा के विनोद खन्ना व एक बार सन्नी देओल चुनाव जीत चुके हैं। 2009 में कांग्रेस के प्रताप सिंह बाजवा सांसद बनने में सफल हुए जबकि 2017 के उप चुनाव में कांग्रेस की टिकट से सुनील जाखड़ चुनाव जीते।
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सुखजिंदर रंधावा - फोटो : फाइल
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विस्तार
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पाकिस्तान की सीमा के साथ लगते गुरदासपुर लोकसभा क्षेत्र पर इस बार कांग्रेस ने कब्जा किया है। इस लोकसभा हलके में कुल नौ विधानसभा हैं। इनमें से 6 हलके जिला गुरदासपुर और तीन पठानकोट के अधीन आते हैं। 

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पिछले 24 साल में इस सीट से चार बार भाजपा के विनोद खन्ना व एक बार सन्नी देओल चुनाव जीत चुके हैं। 2009 में कांग्रेस के प्रताप सिंह बाजवा सांसद बनने में सफल हुए जबकि 2017 के उप चुनाव में कांग्रेस की टिकट से सुनील जाखड़ चुनाव जीते। 2019 में फिर से भाजपा के सनी देओल ने इस सीट पर पार्टी का झंडा बुलंद कर दिया था। हालांकि विनोद खन्ना से पहले इस सीट से कांग्रेस की सुखबंस कौर भिंडर ने लगातार पांच चुनाव जीत कर रिकॉर्ड बनाया था। सुखजिंदर रंधावा ने 2022 के विधानसभा चुनाव में हलका डेरा बाबा नानक से 466 के मामूली अंतर से जीत हासिल की थी। इस बार सुखजिंदर सिंह रंधावा ने भाजपा के गढ़ में सेंध लगाई और सीट कांग्रेस को जीतकर दी। अब वे पहली बार संसद में कदम रखेंगे।

कितने वोट पड़े

रंधावा कुल 82,861 वोटों की बढ़त के साथ चुनाव जीते। उन्हें कुल 3 लाख 64 हजार 043 वोट मिले, जबकि भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार दिनेश बब्बू ने 2 लाख 81 हजार 182 वोटों के साथ दूसरा स्थान हासिल किया है। आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार अमन शेर सिंह शेरी कलसी ने 2 लाख 77 हजार 252 वोटों के साथ तीसरा स्थान हासिल किया है। जबकि शिरोमणि अकाली दल के उम्मीदवार डॉ. दलजीत सिंह चीमा को 85 हजार 500 वोट मिले हैं।

किस हलके में किसकी रही बढ़त

सुजानपुर
ये हलका भाजपा प्रत्याशी दिनेश बब्बू का है। यहां पार्टी को भारी बढ़त मिली। बब्बू को इस हलके में 62,785 वोट मिले। कांग्रेस ने 36004 वोट हासिल किए जबकि 17,258 मत लेकर आम आदमी पार्टी तीसरे स्थान पर रही। अकाली दल को महज 1938 वोट मिले।

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भोआ
भोआ हलका आप के मंत्री लाल चंद कटारुचक्क का है। यहां भी भाजपा का जादू चला और उसे 62,785 मत मिले। कांग्रेस को 43,577 हासिल किए गए। आप को 21,372 मत जबकि अकाली दल को 2825 मत मिले।

पठानकोट
पठानकोट हलके में भी भाजपा ने लीड ही हासिल की। यहां भाजपा को 52,122 मत पड़े। इस हलके में भी कांग्रेस 30 हजार 668 मत लेकर दूसरे स्थान पर रही। आप 16,646 वोट लेकर तीसरे जबकि अकाली दल 2001 मत लेकर चौथे स्थान पर रहा।

गुरदसपुर
गुरदासपुर हलके में टक्कर कांग्रेस और आप में रही। यहां कांग्रेस को 36,981 मत हासिल हुए जबकि आप को 34,228 मत हासिल किए। भाजपा ने 21,954 और अकाली दल ने 10,233 वोट हासिल किए।

दीनानगर
यहां मुकाबला कांग्रेस बनाम भाजपा रहा। कांग्रेस को दीनानगर से 45,319 मत, भाजपा को 36,860 और आप को 27,647 मत हासिल हुए। अकाली दल ने 9059 मत हासिल किए।

कादियां
इस हलके में कांग्रेस पहले नंबर पर रही। कांग्रेस को 41,806 वोट, आप को 38,654 मत हासिल हुए। अकाली दल ने 15,568 मत हासिल कर तीसरा तथा भाजपा चौथे नंबर रही। भाजपा को इस हलके से 12 हजार 959 मत हासिल हुए।

बटाला
हलका बटाला में भी मुकाबला आप तथा कांग्रेस के बीच रहा। इस हलके से कांग्रेस को 36,648 मत पड़े जबकि आप ने 35,713 मत हासिल किए। भाजपा 22,674 मत लेकर तीसरे तथा 10758 मत लेकर चौथे स्थान पर रहे।

फतेहगढ़ चूडियां
हलका फतेहगढ़ चूडि़यां में भी कांग्रेस तथा आप के बीच मुकाबला रहा। इस हलके से कांग्रेस को 42,512 मत हासिल हुए। आप ने 39,640 मत लेकर दूसरा स्थान हासिल किया। इस हलके में तीसरे नंबर पर अकाली दल ने 15 हजार 713 मत हासिल किए जबकि भाजपा को इस हलके से महज 6 हजार 973 मत ही हासिल हुए।

डेरा बाबा नानक
इस हलके में कांग्रेस तथा आप में मुकाबला रहा। यह हलका कांग्रेस के उम्मीदवार तथा पंजाब के पूर्व उप मुख्य मंत्री सुखजिंदर रंधावा का हलका था। यहां कांग्रेस को 48,198 मत मिले, जबकि आप 44,258 मत लेकर दूसरे स्थान पर रही। अकाली दल 1799 मत लेकर तीसरे तथा 5981 मत लेकर भाजपा चौथे नंबर पर रही।

सुखजिंदर सिंह रंधावा की जीत के तीन कारण 

सुखजिंदर सिंह रंधावा का बड़ा नाम
लोकसभा हलके में पड़ते नौ में से छह हलकों पर कांग्रेस का कब्जा
कांग्रेसी विधायकों व नेताओं द्वारा रंधावा को जिताने के लिए दिखाई गई एकजुटता।

दिनेश बब्बू की हार के तीन कारण 

भाजपा के पूर्व सांसद सनी देयोल से लोगों की नाराजगी तथा मोदी सरकार से नाराजगी

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किसान संगठनों द्वारा भाजपा उम्मीद्वार का लगातार विरोध करना।
ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा की कमजोर पकड़।

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