जीवन जीने के साथ-साथ जरूरी है हेल्थ इंश्योरेंस। क्या आप हेल्थ इंश्योरेंस लेना चाहते हैं तो यह खबर पढ़कर जान लिजिए इसके बारे में सब कुछ। 28 वर्षीय राहुल एक प्राइवेट कंपनी में अच्छे ओहदे पर काम करते हैं। उनकी सैलरी भी अच्छी खासी है। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण वह हर महीने घर पर भी पैसे भेजते हैं। साथ ही हर महीने एक तय रकम सेव भी करते हैं।
यह सब राहुल अपने बेहतर भविष्य के लिए कर रहे हैं। लेकिन, एक दिन आफिस से आते हुए एक हादसा हो जाता है और राहुल को अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। वहां इलाज में उनकी पिछले 5-6 साल की सारी सेविंग लग जाती है। कई महीने अस्पताल में रहने के बाद राहुल शारीरिक तौर पर तो ठीक हो गए, लेकिन मानसिक तौर पर यहीं चिंता है कि सालों की मेहनत खर्च हो गई।
एक ओर जहां बैंक बैलेंस जीरो हो गया, वहीं अब एक नई शुरुआत करनी पड़ेगी। इसी चिंता में राहुल के एक दोस्त ने उन्हें बताया कि अगर उसने हेल्थ इंश्योरेंस लिया होता तो उसकी सारी जमा पूंजी बची रहती और इलाज में उसकी जेब से एक पैसा भी नहीं लगता। इसके बाद राहुल को हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस का जीवन में महत्व समझ आया।
मैक्स बूपा के एपीसी एडवाइजर जसपाल सिंह खरबंदा के अनुसार कई बार लोग सिर्फ पैसे के अभाव में अच्छे इलाज से वंचित रह जाते हैं। ऐसे समय के लिए अगर पहले से थोड़ी समझ दिखाई जाए तो कई बार ऐसी सेविंग को उस काम पर खर्च होने से बचाया जा सकता है जो समझदारी से बचाई जा सकती है। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी या हादसे के वक्त खर्च होने वाली रकम को बचाने के लिए ही हेल्थ इंश्योरेंस के तहत मेडिक्लेम पॉलिसी ली जाती है।
रिस्क कवर पर तय होता है प्रीमियम
आज के दौड़भाग के समय में कई बीमारियां 25 से 30 वर्ष के युवाओं को भी चपेट में ले रही हैं। ऐसे में जरूरी है कि अच्छी से अच्छी मेडिकल सुविधा और चिकित्सा खर्च के बोझ से बचने के लिए स्वास्थ्य बीमा लें। इंश्योरेंस सेक्टर के एक्सपर्ट विशाल सिंह के अनुसार सालाना तौर पर ली जाने वाली इस पॉलिसी के कई फायदे हैं।
इसके तहत कोई भी स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर आपकी इंश्योरेंस कंपनी इसका सारा खर्च उठाती है। वहीं यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि आपने कितनी राशि तक का रिस्क कवर लिया है। अगर आपने मेडिक्लेम पॉलिसी में 5 लाख रुपये तक का रिस्क कवर लिया है तो इंश्योरेंस कंपनी इसके अनुसार ही सालाना प्रीमियम तय करेगी।
विशाल के अनुसार वैसे तो हर इंश्योरेंस कंपनी अलग-अलग चार्ज करती है, लेकिन अमूमन तौर पर 5 लाख रुपये तक के रिस्क कवर का प्रीमियम 4 से साढ़े 5 हजार रुपये तक होता है। स्वास्थ्य बीमा के तहत हर वर्ष एक छोटी रकम देकर खुद को तथा अपने परिवार को चिकित्सा खर्चों से सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं।
4 तरह के होते हैं इंश्योरेंस
- लाइफ इंश्योरेंस
- हेल्थ इंश्योरेंस
- मोटर इंश्योंरेंस
- लॉन्ग टर्म डिसेबिल्टी कवरेज
ये कंपनियां करती हैं हेल्थ इंश्योरेंस
मैक्स बूपा, एचडीएफसी लाइफ, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल, स्टार हेल्थ, बजाज जनरल इंश्योरेंस, सिगना टीटीके, अपोलो म्यूनिक, रिलायंस जनरल इंश्योरेंस, न्यू इंडिया इंश्योरेंस, ओरियंटल इंश्योरेंस, नेशनल इंश्योरेंस, रेलीगेयर हेल्थ इंश्योरेंस इत्यादि।
इन बातों का रखें ध्यान
- स्वास्थ्य बीमा की सभी शर्तो को अच्छे से पढ़े।
- स्वास्थ्य बीमा का फॉर्म स्वयं भरें। एजेंट आपकी गलत जानकारी भर सकते हैं।
- स्वास्थ्य बीमा फॉर्म में अपने और परिवार के सदस्यों के बारे में सही जानकारी दें। पहले कोई बीमारी रही हो तो उसके बारे में जिक्र जरूर करें उसे छिपाएं नहीं।
- स्वास्थ्य बीमा की कई तरह की पॉलिसी होती हैं। अपनी आयु और परिवार को ध्यान में रखकर योग्य पॉलिसी का चयन करे।
- किसी भी एजेंट की सलाह लेने से पहले खुद भी इसकी जानकारी जुटा लें। इंटरनेट पर सभी तरह की पॉलिसी और उनके बारे में पूरी-पूरी जानकारी मिल जाएगी।
- आप कितना प्रीमियम चुका सकते हैं। इसको देखते हुए ही पॉलिसी में रिस्क कवर का चयन करें।
- पहली बार स्वास्थ्य बीमा लेने के बाद पहले 30 दिनों में किसी भी तरह की बीमारी के लिए क्लेम नहीं कर सकते हैं। इसके तहत आप केवल दुर्घटना या चोट का ही क्लेम कर सकते हैं।
- परिवार के लिए कम से कम 2 लाख तक का रिस्क कवर जरूर लेना चाहिए।
- कुछ बीमारियां ऐसी हैं जो स्वास्थ्य बीमा के तहत कवर नहीं होती हैं। वहीं इनमें से कुछ बीमारियां कुछ साल पॉलिसी लेने के बाद रिस्क कवर में शामिल हो सकती हैं। एजेंट से इसकी जानकारी जरूर लें।
- स्वास्थ्य बीमा का पहचान पत्र हमेशा साथ रखें।
- कभी अचानक से किसी अस्पताल में भर्ती होना पड़े तो तुरंत स्वास्थ्य बीमा कार्ड और फोटो पहचान पत्र अस्पताल स्टाफ या डॉक्टर को दिखाएं। ताकि कैशलेस की सुविधा होने पर आपको इसका लाभ मिल सके।
- अगर हॉस्पिटल में कैशलेस की सुविधा नहीं होती है तो भर्ती होने के कुछ घंटे के अन्दर ही स्वास्थ्य बीमा कंपनी को कार्ड के पीछे दिए हुए नंबर पर फोन कर अपने अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी दें। इससे आपको अस्पताल में भर्ती होने पर रिम्बर्समेंट के लिए क्लेम में परेशानी नहीं आती हैं।
- स्वास्थ्य बीमा का दावा करते समय भेजे गए सभी दस्तावेजों की कॉपी अपने पास रखनी चाहिए।
क्लेम में परेशानी हो तो यहां करें शिकायत
अगर आपको स्वास्थ्य बीमा कंपनी से क्लेम को लेकर, अन्य तरह की कोई शिकायत है या भुगतान में कोई परेशानी हो रही है तो इसकी शिकायत complaints@irda.gov.in पर कर सकते हैं। इसके अलावा 155255 पर फोन कर भी अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।