पीजीआई में घुटना और हिप ट्रांसप्लांट के रेट तय
पीजीआई ने घुटना व हिप ट्रांसप्लांट के रेट तय कर दिए हैं। दस जून से घुटना ट्रांसप्लांट में 65 हजार से लेकर एक लाख तक खर्च आएगा, जबकि हिप ट्रांसप्लांट में 40 से 70 हजार रुपये। इसमें आपरेशन व अन्य खर्चे भी शामिल किए गए हैं। पहले एक घुटना ट्रांसप्लांट में करीब सवा लाख रुपये का खर्च आता था। जबकि घुटना इम्प्लांट की कीमत 65 हजार से 70 हजार के बीच होती थी। बाकी रुपये कमीशन में चले जाते थे। नए रेट से ट्रांसप्लांट करीब 30-40 हजार रुपये सस्ता पड़ेगा। इस मुद्दे को अमर उजाला ने काफी उठाया था।
अमृत फार्मेसी से मिलेगा इम्प्लांट
अभी तक घुटना इम्प्लांट खरीदने के लिए पीजीआई के डॉक्टर मरीज को सीधे डिस्ट्रीब्यूटर के पास भेजते थे। डिस्ट्रीब्यूटर अपने ढंग से रुपये लगाते थे और पीजीआई में आकर मरीज को घुटना दे देते थे। अब घुटना इम्प्लांट पीजीआई की अमृत फार्मेसी से मिलेगा। अमृत फार्मेसी को ही जिम्मेदारी दी गई थी कि वह कंपनी से को-आर्डिनेट करे। बाद में मीटिंग में तय किया गया कि आरथो इम्प्लांट कंपनियां अमृत फार्मेसी को इम्प्लांट देंगी और मरीज अमृत फार्मेसी से खरीदेंगे।
ऐसे ठगे जा रहे थे मरीज
अमर उजाला ने रिपोर्ट प्रकाशित कर बताया था कि डिस्ट्रीब्यूटर के पास जब घुटना आता है, तब उसकी कीमत (48-52 हजार रुपये) होती है। जब यह इम्प्लांट मरीज के पास पहुंचता है तो उसकी कीमत 90 से एक लाख तक पहुंच जाती है। आपरेशन और दवाइयों का खर्च अलग से आता था। डिस्ट्रीब्यूटर दोगुना मुनाफा कमा रहे थे। हैरानी इस बात की थी कि बीच में कोई एजेंसी नहीं है, इसके बावजूद इम्प्लांट महंगे मिल रहे हैं।
रेट तय करने के लिए पीजीआई गठित की थी कमेटी
मामला उठने के बाद पीजीआई ने एक कमेटी गठित की। कमेटी ने सभी कंपनियों और अमृत फार्मेसी के साथ मीटिंग की। पीजीआई में पांच कंपनियां घुटना इम्प्लांट सप्लाई करती हैं। इनमें मैक्स, स्मिथ एंड नैफ्यू, जिमर, स्ट्राइकर और जानसन एंड जानसन शामिल हैं। कमेटी ने पाया कि यदि सभी सामानों की सप्लाई अमृत से की जाए तो घुटना इम्प्लांट 30-40 हजार रुपये सस्ता पड़ेगा।