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1947 के बंटवारे का दर्द देखना है तो 28 को आए यहां

Fri, 20 Dec 2013 09:49 AM IST
अमर उजाला, चंडीगढ़
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रिश्तों में कड़वाहट हो तो दूरियां लाजिमी हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्तों के बाद दिलों में ऐसी ही कड़वाहट आई है।
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पाकिस्तानी आते हैं जाते हैं और मिलते हैं पर कहीं न कहीं रिश्तों की यह कड़वाहट कायम रहती है। रंगकर्मी गुरशरण सिंह ऐसी ही कहानी कितने पाकिस्तान के जरिए बच्चों को मंच पर लाने वाले हैं।

चंडीगढ़ सेक्टर-26 के ताओ डिस्को में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में गुरशरण सिंह ने बताया भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते सुधारने के चाहे जितने प्रयास किए जाएं पर दोनों देशों के लोगों के दिलों में एक दूसरे के लिए कड़वाहट भरी है।
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यही दूरियां बढ़ने का कारण है। गुरशरण सिंह पंचकूला स्थित इंद्रधनुष सभागार में 28 दिसंबर को नाटक कितने पाकिस्तान मंचित करेंगे।

इसमें बंटवारे से पहले हिंदू, मुस्लिम भाईचारे का मंचन किया जाएगा। नाटक में दिखाया जाएगा कि राजनीति के कारण वह आपस में दुश्मन बन जाते हैं।

आपस में खून बहाने के लिए उतारू हो जाते हैं। रिश्तों मे इतनी खटास आ जाती है कि लोग अलग मुल्क की मांग करते है। हालांकि, यह दूरियां राजनीतिक नेताओं के कारण पैदा हुईं।

बच्चों को ट्रेंड करना आसान
गुरशरण सिंह ने कहा कि बच्चों को ट्रेंड करना काफी आसान है, जबकि बड़े बाड़ी लैंग्वेज को जल्द नहीं पकड़ पाते हैं।

उन्होंने कहा कि पांच साल से 19 साल के बच्चे नाटक के पात्र बनते हैं। छोटे बच्चों का चयन करते वक्त इस बात पर ध्यान दिया जाता है कि डायलॉग बड़े न हों।
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