गांव रंसीह कलां की पंचायत ने घोषणा की थी कि पंचायत अपने स्तर पर पराली न जलाने वाले किसानों को पांच सौ रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा देगी। इस पर गांव के सभी किसानों ने पराली को आग न लगाते हुए सीधी बिजाई शुरू की। इस तरह गांव राज्यभर में पराली न जलाने वाला पहला गांव बना।
इसके अलावा सूखे कूड़े व प्लास्टिक कचरे के बदले गांव वासियों को गुड़, चावल व शक्कर देने जैसे कार्यों के चलते हमेशा से गांव रंसीह कलां की पंचायत चर्चा में रही है। वर्ष 2018 में सरपंच प्रीतइंद्र पाल सिंह मिंटू को गांववासियों ने बिना चुनाव सर्वसम्मति से सरपंच चुना था।
मंगलवार को किसान संगठनों को सुपुर्द करेंगे पुरस्कार
रंसीह कलां के सरपंच प्रीतइंद्रपाल सिंह मिंटू ने कहा कि वह मंगलवार को अपनी टीम के साथ दिल्ली कूच करेंगे। इस दौरान वह किसान संगठनों के दरबार में पेश होकर अपने दोनों राष्ट्रीय पुरस्कार सुपुर्द करेंगे और बैंक खाते के जरिये उन्हें मिली 18 लाख की इनामी राशि को कानूनी प्रक्रिया से ही केंद्र सरकार को वापस लौटा देंगे।
पंजाबियत पर सब कुछ कर देंगे कुर्बान : मिंटू
सरपंच प्रीतइंद्र पाल सिंह मिंटू ने बताया कि 18 लाख की इनामी राशि वापस करने का फैसला उन्होंने सोच समझकर लिया है। कुछ लोगों की सोच है कि पंचायतों के पास विकास के लिए पैसा नहीं है। उनकी पंचायत ने केंद्र से मिले 18 लाख लौटाने का फैसला ले लिया है लेकिन वह बताना चाहते हैं कि दोनों पुरस्कार व 18 लाख इनामी राशि उन्होंने अपने अच्छे कामों की वजह से हासिल किए थे और भविष्य में वह और भी ऐसे कई पुरस्कार व इनाम अपने नाम करते रहेंगे, मगर पंजाबियत और किसानी को बचाने के लिए यह कदम उठाना जरूरी था।