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किसानों को छोड़ने के लिए क्यों गंभीर अपराध के आरोपियों की तरह मांगी जा रही श्योरिटी : हाईकोर्ट

Sat, 28 Nov 2020 07:22 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली कूच करने वाले किसानों को रिहा के लिए श्योरिटी के रूप में 50-50 हजार रुपये मांगे जाने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार से जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने पूछा है कि किसानों को छोड़ने के लिए गंभीर अपराध के आरोपियों की तरह इतनी भारी श्योरिटी क्यों मांगी जा रही है और अब तक कितने किसानों को छोड़ा गया है। 

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हरियाणा सरकार को एक दिसंबर को इस बारे में जानकारी देनी होगी। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता ने जिन 34 किसानों को हिरासत में लेने की बात कही है उसमें से सिर्फ 24 को हिरासत में लिया गया था। इनमे से कई को छोड़ा जा चुका है। कितने किसानों को छोड़ा गया है उसकी जानकारी देने के लिए हरियाणा सरकार ने हाईकोर्ट से कुछ समय मांगा। इस पर याचिकाकर्ता संस्था हरियाणा प्रोग्रेसिव फारमर्स यूनियन के एड्वोकेट प्रदीप रापड़िया ने हाईकोर्ट को बताया कि किसानों को 50 हजार की श्योरिटी पर छोड़ा जा रहा है जो काफी ज्यादा है। 


शुक्रवार को भी कुछ किसानों को हिरासत में लिया है। कितने किसान छोड़े गए हैं इसकी भी जानकारी नहीं दी जा रही है। हाईकोर्ट ने अब सरकार को इन सबकी जानकारी अगली सुनवाई पर देने के आदेश दिए हैं। किसान यूनियन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया था कि 26-27 नवंबर को दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए किसानों के कूच को रोकने के लिए हरियाणा सरकार सोमवार रात से ही किसान नेताओं की धरपकड़ कर रही है। बिना किसी आपराधिक घटना में संलिप्त किसानों के घरों पर छापे मारे और 100 से अधिक नेताओं की बिना कोई कारण बताए गिरफ्तारियां की गईं, जो कि पूरी तरह से असांविधानिक है।
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हलफनामे में कहा- किसानों का रहा है आपराधिक का इतिहास
आईजी आरके आर्य ने हाईकोर्ट में हलफनामा देकर कहा कि किसानों को लेकर इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के आधार पर शांति व्यवस्था बनाए रखने और किसी अप्रिय घटना से बचने के लिए हिरासत में लिया गया है। इससे पहले भी किसानों के कई आंदोलनों में हिंसक घटनाएं हो चुकी हैं और किसान संगठनों का इतिहास आपराधिक रहा है। इसके साथ ही राज्य सरकार द्वारा की गई कार्रवाई को हलफनामे में सही साबित करने का प्रयास किया गया।

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