चढूनी अभी तक राकेश टिकैत से भी दूरी बनाए हुए थे। उन्होंने कंडेला व पिपली महापंचायत में उनके साथ मंच सांझा नहीं किया। लेकिन टिकैत के बढ़ते प्रभाव व किसानों की एकत्रित भीड़ को देखकर वह समझ गए कि एकला चलो से बात नहीं बनने वाली। इससे किसानों में तो गलत संदेश जाएगा ही जमीनी स्तर पर पकड़ मजबूत होने के बजाए आने वाले दिनों में ढीली भी हो सकती है। इसलिए टीम चढूनी ने साथ-साथ आगे बढ़ना ही उचित समझा।
डेडलॉक टूटना चाहिए, बातचीत को तैयार : बैंस
आंदोलनरत किसान सरकार से वार्ता को तैयार हैं। वे डेडलॉक की स्थिति नहीं चाहते। उनका मानना है कि संवाद जारी रहना चाहिए। भाकियू प्रेस प्रवक्ता राकेश बैंस ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कहने के बावजूद सरकार की तरफ से बातचीत का प्रस्ताव आज तक नहीं आया। सरकार उन्हें थकाकर घर भगाने की न सोचे। आंदोलन का हल वार्ता से ही निकलेगा।
रेल रोको के लिए बन रही खास रणनीति
18 फरवरी को प्रस्तावित रेल रोको आह्वान को संयुक्त किसान मोर्चा किसी सूरत में विवादों में नहीं पड़ने देना चाहता। दिल्ली घटना की पुनरावृत्ति रेल रोकने के दौरान न हो इसलिए खास रणनीति बनाई जा रही है। किसान नेता विशेष टीमों के गठन पर भी विचार कर रहे हैं। ये टीमें किसी सूरत में रेल रोको आंदोलन के दौरान अप्रिय घटना नहीं होने देंगी। न ही सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जाएगा।