लाइब्रेरी से कुछ साहित्य मुफ्त बांटा भी जा रहा है। इन पुस्तकों को वापस नहीं लिया जाता। कई लेखक व प्रकाशक भी किसानों के पड़ाव में किताबें बांटते हैं। भारत में खेती, वीर भगत सिंह और पंचनद प्रदेश पंजाब जैसी कई किताबें सैकड़ों की संख्या में यहां बांटी जा चुकी हैं। लूणा, चिट्टा लहू, ऐहो हमारा जीवणा, जवाहर लाल नेहरू: द ज्वेल्ज ऑफ इंडिया और प्रो. पूर्ण सिंह द्वारा लिखित द टेन मास्टर्स को भी लाइब्रेरी संचालकों ने किसानों को नि:शुल्क पढ़ने के लिए उपलब्ध करवाया है।
पाठक बोले- अध्ययन के लिए लाइब्रेरी जरूरी
नए बस अड्डे के पास अपनी ट्रॉली में मौजूद बुढलाडा से आए अरुण कुमार (48) ने बताया कि आंदोलन में सक्रिय भागीदारी के बाद मैं हर रोज दो-तीन घंटे किताबें पढ़ता हूं। फिलहाल मैं रजनीकांत लहरी की ‘अनंत की ओर’ पढ़ रहा हूं। यह मुझे पेट्रोल पंप पर खोली गई लाइब्रेरी से निशुल्क मिली है।
बठिंडा के सर्वजीत सिंह ने बताया कि वह हर रोज दो घंटे अध्ययन करते हैं। घर से तीन किताबें लेकर आए थे। अब लाइब्रेरी से मदद मिल रही है। मोगा के युवा हर्षदीप सिंह ने लाइब्रेरी से पढ़ने के लिए ‘मेटरनल हेल्थ केस स्टडीज फ्रॉम इंडिया’ ली। उन्होंने बताया कि यहां लाइब्रेरी में किताबें बेशक बहुत कम संख्या में हैं लेकिन ऐसी जगह लाइब्रेरी देखकर दिल खुश हो गया।
बठिंडा के बुजुर्ग गुरमेल सिंह ने लाइब्रेरी से ‘दुनिया तों न्यारे गुरु गोविंद सिंह’ में रुचि दिखाई। आंदोलन शुरू होने के बाद यह लाइब्रेरी 30 नवंबर को शुरू हुई। यहां मौजूद सुखदेव सिंह के मुताबिक अब तक 1108 लोग यहां से सेवा ले चुके हैं। लाइब्रेरी को संभाल रहे बठिंडा के संदीप सिंह ने बताया कि युवा आंदोलनकारी आधुनिक साहित्य में रुचि ले रहे हैं। यहां आने वाले ज्यादातर बुजुर्ग धर्म-कर्म की किताबों में रुचि दिखाते हैं। उन्होंने बताया कि सोनिया सिंह यहां से धार्मिक किताब लेकर जाती हैं और आंदोलनकारी महिलाओं को पढ़कर सुनाती हैं। पढ़ने के बाद सभी लोग पुस्तक लौटा जाते हैं।