लंबा चलते जा रहे किसान आंदोलन के बीच राज्य व केंद्र सरकार किसानों को अब अफवाहों के दौर से निकालने की जोरआजमाइश में जुट गई हैं। सरकार किसानों को यह समझाने की कोशिश कर रही है कि कृषि कानूनों पर झूठी अफवाहें फैलाकर विपक्ष उन्हें गुमराह कर अपना सियासी स्वार्थ साध रहा है। लिहाजा बात ‘जिद’ से नहीं ‘चर्चा’ से ही बनेगी और आंदोलन का गतिरोध भी आपसी बातचीत से ही खत्म होगा।
हरियाणा सरकार को निर्देश, जिलों में न भड़के आंदोलन
सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार ने हरियाणा सरकार को निर्देश दिए हैं कि आंदोलन की आंच जिला स्तर पर स्थायी रूप से नहीं रहनी चाहिए। 14 नवंबर को किसान नेताओं के आह्वान पर जिला मुख्यालयों पर किसानों का धरना प्रदर्शन व भूखहड़ताल की गई थी। हरियाणा के हर जिले में भी यह प्रदर्शन हुए। इसके अलावा दिल्ली सीमाओं पर जो किसान बीस दिन से धरने पर बैठे हैं, वह अधिकतर इलाका भी हरियाणा का ही है। लिहाजा केंद्र ने प्रदेश सरकार को निर्देश दिए हैं कि किसानों का यह आंदोलन जिला स्तर पर स्थायी रूप से न रहे और न ही कानून व्यवस्था बिगड़े। कोशिश रहे कि स्थानीय स्तर पर किसानों को शांत करके रखा जाए।
किसान तय करेंगे आंदोलन की नई रणनीति, नया रुख
आंदोलन का अगला चरण क्या रहेगा। इसकी रणनीति किसान तय करेंगे। आंदोलनरत किसानों की संयुक्त किसान मोर्चा जल्द ही बैठक कर अपनी रणनीति का खुलासा करेगी। अभी किसान संगठनों के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती है एकजुट रहना और अपने आंदोलन को असामाजिक तत्वों से दूर रखते हुए शांतिपूर्ण बनाए रखना। भाकियू अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि किसान इस बात को लेकर स्पष्ट हैं कि कृषि कानून वापस लिए जाएं। सरकार का कहना है कि किसानों से बातचीत के लिए उनके दरवाजे खुले हैं।