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किसान आंदोलन : सरकार को लिखित जवाब भेजा, संशोधन मंजूर नहीं, कानून रद्द करने के प्रस्ताव पर बातचीत

Thu, 24 Dec 2020 12:04 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोनीपत (हरियाणा)

सार

  • किसान नेताओं ने कहा कि सरकार बार-बार उन संशोधन प्रस्ताव को भेज रही, जिनको हम खारिज कर चुके
  • सरकार पर धोखा करके एजेंडे पर नहीं जाने का आरोप लगाया, किसान किसी भी हालत में नहीं हटेंगे 
  • अन्नदाता दिवस पर किसानों ने त्यागा एक समय का भोजन, किसान संगठनों के 11 नेता क्रमिक अनशन पर बैठे 
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किसान आंदोलन। (फाइल फोटो)
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विस्तार
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सरकार के प्रस्ताव को किसानों ने नकारते हुए उसका लिखित में जवाब भेज दिया है। किसान नेताओं ने साफ कर दिया कि उनको संशोधन मंजूर नहीं है और कानून रद्द करने का प्रस्ताव मिलता है तो बातचीत जरूर करेंगे। सरकार बार-बार पुराने प्रस्ताव को भेजकर हर किसी को गुमराह कर रही है और वह धोखा करके एजेंडे पर नहीं आना चाहती है। वहीं किसानों ने पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जयंती अन्नदाता दिवस के रूप में मनाकर एक समय का भोजन त्यागा। इसके अलावा किसान संगठनों के 11 नेता क्रमिक अनशन पर बैठे। 

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किसान नेता योगेंद्र यादव, शिवकुमार कक्का, गुरनाम सिंह चढूनी, हनान मुला, युद्धबीर सिंह ने कहा कि किसानों के आंदोलन को सरकार बदनाम कर रही है। यह आंदोलन किसानों का है और सरकार कभी अलगाववादी बताती है तो कभी क्षेत्रवाद का रंग देने का प्रयास कर रही है। सरकार फूट डालने का प्रयास भी कर रही है, जिसके लिए कागजी संगठनों को किसान बताकर बातचीत की जाती है। किसान नेताओं ने कहा कि इस बार उच्च स्तर पर बात करके ठोस प्रस्ताव भेजने के लिए कहा गया था लेकिन उसके बावजूद पुरानी बात लिखकर प्रस्ताव भेज दिया गया। 


वह प्रस्ताव भेजा गया है, जिसे हम पहले ही नामंजूर कर चुके हैं। हर बार पुरानी बातों को घुमाकर लिखा जाता है और हमारे पास भेज दिया जाता है। सरकार हमारे पाले में गेंद डालना चाहती है, जबकि पहले भी गेंद सरकार के पाले में थी और अब भी उनके पाले में गेंद है। सरकार हमे गिफ्ट देना चाहती है लेकिन हमने बता दिया कि हमे क्या गिफ्ट चाहिए। अब सरकार वह गिफ्ट क्यों नहीं दे रही है। 
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उन्होंने कहा कि किसान संगठन सरकार से वार्ता करने को तैयार है लेकिन सरकार कब खुले मन व साफ नीयत से इस वार्ता को आगे बढ़ाएगी, यह उसे तय करना है। सरकार को समय खराब करने की जगह ठोस प्रस्ताव भेजने चाहिए। किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि गृहमंत्री अमित शाह के साथ जब बातचीत हुई तो उस समय वह खुद इस बात से मुकर गए कि सरकार पूरी फसल को एमएसपी पर खरीदेगी। इसलिए ही किसान मांग कर रहे हैं कि सरकार एमएसपी की गारंटी के साथ ही पूरी फसल खरीदने की गारंटी भी दे। वहां किसान नेताओं ने कहा कि सरकार की ओर से आंदोलन में शामिल होने वाले किसानों को परेशान किया जा रहा है। उनके 50-50 लाख रुपये के मुचलके भरवाए जा रहे है तो किसानों को बैरिकेड लगाकर रोका जा रहा है। इस तरह का उत्पीड़न सहन नहीं किया जाएगा और किसान आंदोलन को तेज करने की चेतावनी दी गई। 

तृणमूल के पांच सांसद सिंघू बॉर्डर पहुंचे
पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के निर्देश पर उनकी पार्टी तृणमूल के पांच सांसद डेरेक ओ ब्रायन, शताब्दी रॉय, प्रसून बनर्जी, प्रतिमा मंडल, मोहम्मद नदीमुल हक भी सिंघू बॉर्डर पहुंचे। जहां उन सभी ने किसानों से बातचीत की और उनके साथ रहने की बात कही है।

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