बातचीत को शुरू करने के लिए संयुक्त किसान मोर्चा ने पहल करते हुए करीब एक महीना पहले पीएम नरेंद्र मोदी को चिट्ठी भेजी लेकिन उसके बावजूद बात नहीं बनी। इससे किसानों का गुस्सा बढ़ रहा है और अब मानसून सत्र के दौरान संसद मार्च की तैयारी की जा रही है। हालांकि पहले भी संयुक्त किसान मोर्चा दो बार संसद मार्च का एलान कर चुका है।
एक फरवरी को संसद मार्च का फैसला दिल्ली में ट्रैक्टर मार्च में बवाल के बाद निरस्त करना पड़ा तो मई में संसद मार्च करने के फैसले को हिंसा की आशंका के कारण निरस्त किया गया था। इसको लेकर संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं में आपसी खींचतान भी हुई थी तो संसद मार्च निरस्त करने पर युवाओं ने हंगामा भी किया था। लेकिन अब संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा है कि हर कोई संसद मार्च चाहता है और किसी तरह की हिंसा नहीं हो, उसको रोकने के लिए रस्सी से हाथ बांधकर संसद मार्च किया जाए।
हाथ बांधकर मार्च करने वालों को साथी समझा जाएगा और हाथ नहीं बांधने वालों को बाहरी लोग माना जाएगा। इस तरह अगर किसानों को पुलिस रोकती है और किसी तरह का बल प्रयोग करती है, तब भी किसी तरह की हिंसा नहीं हो सकेगी। इसको लेकर गुरनाम सिंह चढूनी ने सुझाव भी मांगे हैं, जिससे संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में बात रखकर इस पर फैसला लिया जा सके।