खुशप्रीत की हत्या के मामले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में आरोपियों के खिलाफ सीआरपीसी की धारा 313 के तहत बयान दर्ज किए गए।
मामले में आरोपी सुखदेव सिंह, भाई गुरविंद्र सिंह और उनके नौकर नंदकिशोर ने बयानों में कहा कि उन्होंने किसी का भी अपहरण और हत्या नहीं की है।
पुलिस ने अपना मामला सुलझाना के लिए उन्हे जबरदस्ती फंसाया गया है। उन्होंने न ही किसी से कर्ज लिया था और न ही इस कर्ज को चुकाने के लिए उन्होंने खुशप्रीत का अपहरण कर चार लाख की फिरौती मांगी थी।
आरोपी भाइयों ने कहा कि उन्होंने पुलिस के सामने गिरफ्तारी के दौरान कोई कबूलनामा नहीं किया था। मामले में अदालत ने अब बचाव पक्ष की गवाहियों के लिए 12 मार्च की तारीख तय की है।
दायर मामला 21 दिसम्बर 2010 का है। बुडै़ल निवासी पांच वर्षीय खुशप्रीत का अपहरण घर के पास से ही गया था। अपहरण के बाद उसके चाचा के मोबाइल फोन पर दस लाख रुपये की फिरौती की कॉल आई थी।
खुशप्रीत के परिजनों ने बच्चे को बचाने के लिए अपहरणकर्ताओं को चार लाख फिरौती दी थी। फिरौती लेने के बाद पांच जनवरी 2011 को अपहरणकर्ताओं ने खुशप्रीत की हत्या कर शव मोहाली में फेंक दिया था।
डीएसपी विजय कुमार ने हत्या के मामले में खु़लासा करते हुए खुशप्रीत के पड़ोसी सुखदेव और गुरमिंदर को दबोचा था।
बाद में पुलिस ने मामले में शामिल उनके नौकर नंद किशोर को पकड़ा था। 07 अगस्त 2011 को अदालत ने सुखदेव, गुरमिंदर और नंद किशोर के खिलाफ आरोप तय किए थे।