पंजाब यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (पुटा) के चुनाव स्थगित होने के बाद खालिद-सिद्धू ग्रुप के अध्यक्ष व सचिव पद के उम्मीदवारों ने चुनाव स्थल इवनिंग ऑडिटोरियम पर एक घंटा धरना दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुटा के सचिव को हर चीज का पता था। चुनाव प्रक्रिया शुरू होने से लेकर आखिर तक की बातें पता थीं, लेकिन उन्होंने शिक्षक समाज को अंधेरे में रखा। उनके इस व्यवहार के खिलाफ वह धरने पर बैठे हैं।
उन्होंने कहा कि चुनाव अधिकारी (आरओ) का इसमें दोष नहीं है, उनके नाम का प्रयोग कर उनके सिर पर ठीकरा फोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि पुटा का चुनाव शिक्षकों के लिए बहुत जरूरी है। चाहे ऑनलाइन हों या फिर ऑफलाइन इसके लिए अनुमति ली जाएगी। अगले सप्ताह इस प्रकरण को लेकर डीसी चंडीगढ़ से मुलाकात करेंगे। धरना देने के बाद खालिद-सिद्धू ग्रुप ने दोपहर में प्रेसवार्ता की। दूसरे ग्रुप पर आंकड़ों के साथ आरोप लगाए।
ये लगाए गए हैं आरोप
- हर पत्र पुटा के सचिव के पास आए और उसको उन्होंने आरओ को भेजे। सचिव को हर बात का पता था, लेकिन उन्होंने शिक्षकों को नहीं बताया।
- डीसी को चुनाव की अनुमति के लिए पत्र लिखा गया या नहीं, यह भी शिक्षकों और हमें नहीं बताया गया।
- छात्र संघ चुनाव नहीं हो पाया। उसके लिए मांग रखी गई कि पुराने पदाधिकारियों को नियमित कर दिया जाए। इसी तरह पुटा के पूर्व पदाधिकारी भी चुनाव नहीं करवाना चाहते थे। इसके लिए दबाव बनाया और पत्र लिखे तब जाकर कार्यकाल खत्म होने के बाद चुनाव की प्रक्रिया शुरू की गई।
- चुनाव स्थगित करने का अधिकार पुटा संविधान में आरओ के पास नहीं है, लेकिन उनसे स्थगन आदेश जारी करवाए गए।
- सचिव चुनाव की प्रक्रिया से लेकर आखिरी समय तक के सभी अभिलेख शिक्षकों के सामने रखें और मेल करें।
- शिक्षकों की ओर से दिए गए पत्र से पहले डीसी को पत्र लिखा गया या बाद में, यह भी बताया जाए।
- पुटा संविधान बने काफी समय हो गया, लेकिन आठ पेज भी सचिव व अन्य लोग नहीं पढ़ सके। ऐसे में वह शिक्षकों का भला कैसे कर सकते हैं।
- पुटा के लेटरहेड का राजनीति रूप से प्रयोग किया गया।
- शिक्षकों की रक्षा करने के दावे दूसरा ग्रुप कर रहा है, लेकिन खुद अपने लिए काम कर रहे हैं।
- अगर चुनाव स्थगित हो रहे थे तो दूसरा ग्रुप वीसी से क्यों नहीं मिला।
- जब पढ़ाई ऑनलाइन हो सकती है तो चुनाव क्यों नहीं।
ये की गई शुरू से लेकर आखिर तक गलतियां
- पहली वोटर लिस्ट में मृतक शिक्षकों के नाम भेजकर उनका मजाक उड़ाया गया। 65 साल से अधिक आयु वाले शिक्षकों के भी नाम शामिल थे।
- अंतिम वोटर लिस्ट में भी कुछ शिक्षकों के विभाग परिवर्तित थे।
- नामांकन के दौरान उनके एक पक्ष के साथी का नाम गायब कर दिया गया।
- चुनाव की तिथि कार्यक्रम में विभाग का नाम व समय भी सही नहीं दर्शाया गया।
इसलिए पुटा का चुनाव जरूरी
- पुटा का चुनाव इसलिए जरूरी है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू होगी। ऐसे में प्रशासन तमाम कार्य ऐसे शिक्षकों के जिम्मे दे सकता है जो उनके अधिक भार का प्रदर्शित करेंगे। ऐसे में पुटा ही उनका प्रकरण उठा सकती है।
- प्रमोशन से लेकर पास्ट सर्विस काउंट कराने, सातवें वेतनमान का लाभ दिलाने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। इनका हल बहुत जरूरी है।
- शिक्षकों की शिकायतों के निपटारे के लिए मंच की जरूरत है।
- यूजीसी की नई-नई गाइड लाइनें आ रही हैं। शिक्षकों पर अधिक भार डाला जा रहा है। उसके लिए संगठन ही आवाज उठा सकता है।
सर्वसम्मति से बन जाए बात, आरओ के सामने रखा था प्रस्ताव
प्रो. मोहम्मद खालिद ने बताया कि नाम वापसी वाले दिन उन्होंने आरओ को मैसेज भेजकर कहा था कि सर्वसम्मति से चुनाव करवा दिए जाएं। इसके लिए हम तैयार हैं। अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व सचिव का पद हमने मांगा था। बाकी तीन महत्वपूर्ण पद उनको देने का प्रस्ताव रखा था। बाकी ग्रुप वाइज दो-दो सदस्य दोनों ग्रुप के चुन लिए जाएंगे। इस प्रस्ताव के लिए संदेश तो भेजा, लेकिन उसका जवाब उन्हें नहीं मिला। कहा कि पता नहीं आरओ ने यह प्रस्ताव दूसरे ग्रुप के सामने रखा था या नहीं।
पुटा सचिव का खालिद ग्रुप को जवाब
पुटा सचिव प्रो. जेके गोस्वामी ने खालिद ग्रुप को लिखा है कि वह उनके पत्र का जवाब नहीं देते, लेकिन उन्होंने यह पत्र सोशल मीडिया में पोस्ट कर दिए हैं। सोशल मीडिया में पोस्ट करने की आपकी आदत बन चुकी है। उनका कहना है कि पुटा के चुनाव की तारीखें जल्द सामने होंगी। कुछ धैर्य बनाएं। उम्मीद है कि चुनाव के लिए जल्द अनुमति मिल जाएगी। उन्होंने कहा कि मेल के जरिए जो भी पत्र उनके पास आए उन्होंने बिना देरी किए आरओ को भेज दिए। उसी में डॉ. प्रियतोष आदि का पत्र भी शामिल था। पुटा के मेल पर आए पत्र को सही जगह पर भेजने का मेरा काम था।
मृत्युंजय ग्रुप का जवाब
डॉ. मृत्युंजय कुमार ने कहा कि पुटा चुनाव के लिए हमने पूरी तैयारी कर ली थी। एक दिन पहले हमने प्रेसवार्ता की और पंफलेट भी प्रकाशित करवाए। यदि हमें पता होता कि चुनाव नहीं होंगे तो हम प्रेसवार्ता क्यों करते और न ही पंफलेट छपवाते। चुनाव स्थगित होने से मुझे दुख हुआ है। जल्द ही चुनाव करवाने के लिए हम प्रयास करेंगे।