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Chandigarh News: खालिस्तानी समर्थक जसविंदर सिंह मुल्तानी भगोड़ा घोषित

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चंडीगढ़। बुड़ैल मॉडल जेल की दीवार के पास कथित रूप से बम रख जेल उड़ाने के प्रयास मामले में एनआईए की विशेष अदालत ने खालिस्तान समर्थक सिख फॉर जस्टिस के प्रमुख सदस्य जसविंदर सिंह मुल्तानी को भगोड़ा घोषित कर दिया है। इस मामले में एनआईए कोर्ट ने फरार चल रहे आरोपी मुल्तानी के खिलाफ नोटिस जारी कर उसको 31 मई 2023 तक कोर्ट के सामने उक्त मामले में अपना पक्ष रखने के लिए समय दिया था। लेकिन इसके बाद भी उसके पेश न होने के चलते अदालत ने उसे भगोड़ा घोषित किया है। बता दें कि एनआईए ने अप्रैल 2022 में बुडैल मॉडल जेल उड़ाने के लिए दीवार के पास मिले बम के मामले में आरोपी बनाया है। उक्त मामले में मुल्तानी के संभावित ठिकानों पर जमानती और गैर जमानती वारंट की तामिली न होने के चलते एनआईए ने अदालत में अर्जी डाल भगोड़ा घोषित करने की दरखास्त की थी। इसी अर्जी पर एनआईए की कोर्ट ने जसविंदर सिंह मुल्तानी को भगोड़ा घोषित किया है।
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क्या था मामला

23 अप्रैल 2022 को चंडीगढ़ पुलिस के ऑपरेशंस सेल की एक टीम ने शाम करीब 7.30 बजे इलाके में गश्त कर रही थी इस दौरान टीम ने जेल की दीवार के पास धुआं देखकर बम की खोज की थी। पुलिस ने पाया कि जेल की दीवार के पास एक बैग रखा हुआ है। पुलिस और बम स्क्वायड की टीम ने जांच के दौरान बैक के भीतर मौजूद बॉक्स में डेटोनेटर और कुछ जले हुए तारों को एक बैग में छुपा कर रखा गया है।

बम को अगले दिन राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) की एक टीम ने निष्क्रिय कर दिया था। डेटोनेटर एक पाकिस्तानी अखबार में लपेटा गया था। बैग में कुछ प्रिंटआउट भी थे, जिन पर खालिस्तान एक्शन फोर्स लिखा हुआ था। इलाके की तलाशी के दौरान 28 अप्रैल को एक मोबाइल फोन के साथ एक और डेटोनेटर मिला। पुलिस ने इलाके के मोबाइल डेटा का विश्लेषण किया और कई संदिग्ध नंबरों को शॉर्टलिस्ट किया। इनमें से एक बम मिलने के बाद से बंद था। नंबर जसविंदर सिंह मुल्तानी के नाम पर था और इसका इस्तेमाल जर्मनी में अंतरराष्ट्रीय कॉल करने के लिए किया जाता था। अमेरिका स्थित एसएफजे के संस्थापक गुरपतवंत सिंह पन्नू का करीबी सहयोगी, मुल्तानी भी कथित तौर पर 2021 लुधियाना अदालत विस्फोट का मास्टरमाइंड था। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908 की धारा 3 और 4 के साथ-साथ गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की धारा 13, 18 और 20 के तहत मामला दर्ज किया है। 18 मई, 2022 को एनआईए ने इस मामले को अपने हाथ में लिया। मुल्तानी मूल रूप से होशियारपुर के मुकेरियां के पास मंसूरपुर गांव के रहने वाले हैं। पूरे पंजाब में दर्ज कई एफआईआर में उनका नाम है। मामले के रिकॉर्ड से पता चलता है कि आरोपी फरार हो गया है या अपनी उपस्थिति छुपा रहा है ताकि उसके खिलाफ वारंट निष्पादित न किया जा सके। इसलिए, दी गई परिस्थितियों में, सीआरपीसी की धारा 82 के तहत आवश्यक उद्घोषणा जारी करने का आदेश दिया जाता है, जिसमें उपरोक्त अभियुक्तों को उक्त उद्घोषणा के प्रकाशन/प्रतिष्ठित होने की तारीख से 30 दिनों के भीतर अदालत में पेश होने की आवश्यकता होती है।
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कौन है जसविंदर सिंह मुल्तानी...
वर्ष 1976 में जन्मा जसविंदर सिंह मुल्तानी, मूल रूप से पंजाब के होशियारपुर में गांव मुकेरिया का रहने वाला है। जसविंदर का एक भाई और है। कामयाबी और अमीर बनने की चाहत में दोनों भाई जर्मनी जाकर कारोबार करने लगे। वहां उन दोनों की एक बड़ी दुकान है। इसी दौरान जसविंदर सिंह मुल्तानी अलगाववादी गतिविधियों में शामिल हो गया और आतंकी संगठन सिख फॉर जस्टिस के साथ जुड़ गया। तभी से जसविंदर सिंह मुल्तानी आतंकी गतिविधियों में भी शामिल बताया जाता है। वह सिख फॉर जस्टिस के संस्थापक गुरपतवंत सिंह पन्नू का बेहद करीबी माना जाता है। उसी ने किसान आंदोलन के दौरान दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर किसान नेता की हत्या की साजिश रची थी। लेकिन सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस ने उसकी साजिश का खुलासा कर उसे नाकाम कर दिया था। सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि जसविंदर सिंह मुल्तानी भारत के विभिन्न शहरों में हुए धमाकों और धमाकों की साजिश में शामिल रहा है। इनमें चंडीगढ़ की मॉडर्न जेल बम से उड़ाने की साजिश, लुधियाना कोर्ट ब्लास्ट भी शामिल है। आपको बताते चलें कि लुधियाना कोर्ट परिसर की दूसरी मंजिल पर बनी टॉयलेट में 23 दिसंबर को बम धमाका हुआ था। ये धमाका आईईडी से किया गया था।
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