माना जाता है कि आईएसआई के एजेंटों ने उसे निर्दोष युवा सिखों को धर्म के नाम पर प्रेरित करने के लिए कहा था। आईएसआई के कहने पर अमृतपाल सिंह पिछले साल अगस्त में भारत आया था। साथ ही वारिस पंजाब दे की कमान संभाली।
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वहीं, उसने खालसा वहीर नामक अभियान चलाने की तैयारी की थी। इससे पहले वारिस पंजाब दे संस्था के प्रमुख दीप सिद्धू की गत साल सड़क हादसे में मौत हो गई थी। इसके बाद अमृतपाल को संस्था का प्रमुख बनाया गया था।
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12वीं नहीं हुई पास तो चाचा के पास भेज दिया गया था दुबई
अमृतसर के गांव जल्लूपुर खेड़ा निवासी अमृतपाल सिंह गांव के ही सरकारी स्कूल में पढ़ता था। जब 12वीं कक्षा पास नहीं हो पाई तो वह 2015 में अपने चाचा के पास दुबई चला गया। अमृतपाल का चाचा दुबई में ट्रक ट्रांसपोर्ट का काम करता था। अमृतपाल भी इसी काम में जुट गया।
अमृतपाल सिंह पंजाब आने से पहले गायक और अदाकार दीप सिंद्धू की ओर से गठित की वारिस पंजाब दा जत्थेबंदी के लोगों से ऑनलाइन संपर्क में आया था। किसान आंदोलन के जत्थेबंदी की गतिविधियों को अमृतपाल ऑनलाइन चलाता रहा। इसके चलते वह दीप सिद्धू के साथ संपर्क में आ गया।
दीप सिद्धू ने 30 सितंबर, 2021 को इस संगठन की नींव रखी थी। किसान आंदोलन और उसके बाद 26 जनवरी 2021 को लाल किला हिंसा मामले में दीप सिद्धू का नाम आया। 15 फरवरी 2022 को दिल्ली से पंजाब लौटते वक्त सोनीपत के पास एक सड़क हादसे में दीप सिद्धू की मौत हो गई थी।
इस बीच अमृतपाल दुबई से लौटा और 29 सितंबर, 2022 को मोगा के गांच रोडे पहुंचा। यह गांव जरनैल सिंह भिंडरांवाले का पैतृक गांव है। अमृतपाल खुद को भिंडरांवाले का समर्थक बताते हुए 29 सितंबर को वारिस पंजाब दे संगठन का प्रमुख बन गया।
यहां उसकी दस्तारबंदी की गई। इसके बाद उसने केंद्र सरकार, सेना, सरकार के सिस्टम को चुनौती देना शुरू किया। युवाओं को खालिस्तान बनाने के लिए बरगलाने लगा।