अमृतपाल सिंह की तलाश में शनिवार दोपहर पुलिस ने जालंधर की शाहकोट-मलसियां रोड पर ऑपरेशन चलाया। पुलिस ने मौके से संस्था के सात लोगों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि अमृतपाल सिंह मौके से अपने कुछ साथियों के साथ फरार हो गया। उसके पीछे पुलिस की करीब 60 गाड़ियां लगी। पुलिस को पीछे देखकर उसका ड्राइवर गाड़ी लिंक रोड की तरफ मोड़कर भगा ले गया।
पंजाब पुलिस खालिस्तान समर्थक और कट्टरपंथी अमृतपाल सिंह की तलाश में जुटी है। पंजाब में उसकी तलाश में पुलिस जगह-जगह दबिश दे रही है। माहौल बिगड़ने की आशंका के मद्देनजर पंजाब में रविवार दोपहर तक मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं।
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फाजिल्का, मोगा, बठिंडा और मुक्तसर समेत कई जिलों में धारा 144 लागू करने के साथ ही भारी सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हैं। हिमाचल और जम्मू-कश्मीर से लगती पंजाब की सीमा को सील कर दिया गया है।
संगठन वारिस पंजाब दे के प्रमुख अमृतपाल की गिरफ्तारी को लेकर बड़ा ऑपरेशन चलाते हुए उसके 78 समर्थकों को गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही देर रात पुलिस ने अमृतपाल सिंह के फाइनेंसर दलजीत सिंह कलसी को गुरुग्राम से गिरफ्तार कर लिया है। जबकि उसका चाचा हरजीत सिंह, ड्राइवर हरप्रीत, गुरु औजला, तूफान और पफ्लप्रीत सिंह अभी फरार हैं।
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जालंधर सीपी कुलदीप चहल ने बताया कि अमृतपाल की दोनों गाड़ियां जब्त करने के साथ उसके सभी गनर को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। गनर के शस्त्र लाइसेंसों की जांच चल रही है। उधर, शनिवार दोपहर पुलिस ने जालंधर की शाहकोट-मलसियां रोड पर ऑपरेशन चलाया। पुलिस ने मौके से संस्था के सात लोगों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि अमृतपाल सिंह मौके से अपने कुछ साथियों के साथ फरार हो गया।
उसके पीछे पुलिस की करीब 60 गाड़ियां लगी। पुलिस को पीछे देखकर उसका ड्राइवर गाड़ी लिंक रोड की तरफ मोड़कर भगा ले गया। जालंधर और मोगा पुलिस उसके पीछे लग गई। कई किलोमीटर पीछा करने के बाद भी पुलिस उसे दबोच नहीं पाई।
कैसे 'वारिस पंजाब दे' का प्रमुख बना अमृतपाल सिंह
अमृतपाल सिंह अमृतसर के जल्लूपुर खेड़ा गांव का रहने वाला है। 12वीं पास अमृतपाल दुबई चला गया। वहां वह ट्राला चलाया करता था। बाद में ट्रांसपोर्ट के व्यवसाय से जुड़ा था। इसी दौरान वह पंजाबी एक्टर दीप सिद्धू के ''''वारिस पंजाब दे'''' संगठन के संपर्क में आया। दीप सिद्धू ने 30 सितंबर, 2021 को इस संगठन की नींव रखी थी।
सड़क हादसे में हुई थी दीप सिद्धू की मौत
किसान आंदोलन और उसके बाद 26 जनवरी 2021 को लाल किला हिंसा मामले में दीप सिद्धू का नाम आया। 15 फरवरी 2022 को दिल्ली से पंजाब लौटते वक्त सोनीपत के पास एक सड़क हादसे में दीप सिद्धू की मौत हो गई थी। इस बीच अमृतपाल दुबई से लौटा और 29 सितंबर, 2022 को मोगा के गांच रोडे पहुंचा।
यह गांव जरनैल सिंह भिंडरांवाले का पैतृक गांव है। अमृतपाल खुद को भिंडरांवाले का समर्थक बताते हुए 29 सितंबर को वारिस पंजाब दे संगठन का प्रमुख बन गया। यहां उसकी दस्तारबंदी की गई।
इसके बाद उसने केंद्र सरकार, सेना, सरकार के सिस्टम को चुनौती देना शुरू किया। युवाओं को खालिस्तान बनाने के लिए बरगलाने लगा। उसने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को ललकारते कहा कि इंदिरा गांधी ने भी सिखों को कुचलने की कोशिश की थी, सब जानते हैं कि उनका क्या अंजाम हुआ। अब अमित शाह भी अपना चाव पूरा कर देख लें।
अमृतपाल पर दर्ज हैं चार मामले
अमृतपाल के खिलाफ चार केस दर्ज हैं। इनमें से तीन मामले अमृतसर जिले के अजनाला थाने में हैं। अपने एक करीबी लवप्रीत सिंह की गिरफ्तारी से नाराज होकर अमृतपाल ने 23 फरवरी को समर्थकों के साथ अजनाला थाने पर हमला कर दिया था। इस केस में उस पर कार्रवाई नहीं होने के चलते पंजाब पुलिस की काफी आलोचना हो रही थी। अमृतपाल सिंह पर आरोप था कि वह श्री गुरु ग्रंथ साहब की आड़ लेकर थाने पहुंचा था और भीड़ को हमले के लिए उकसाया। इस हमले में एसपी समेत छह पुलिसकर्मी जख्मी हो गए थे। इसके अलावा उस पर भड़काऊ भाषण देने का केस भी दर्ज है।
मोहाली में नंगी तलवारें लहराईं
अमृतपाल की कार्रवाई की खबरों के बाद कौमी इंसाफ मोर्चा के सदस्य सड़कों पर उतर गए और गिरफ्तारी के विरोध में प्रदर्शन करने लगे। नंगी तलवारों डंडों के साथ उतरे कौमी इंसाफ मोर्चा के सदस्यों ने मोहाली एयरपोर्ट रोड पर जाम दिया।