पुटा के चुनाव स्थगित होते ही खालिद और मृत्युंजय ग्रुप में घमासान मच गया। दोनों ग्रुप एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं कि उनके कारण चुनाव स्थगित किए गए हैं। दोनों ही पक्षों का दावा है कि उनकी जीत सुनिश्चित थी इस कारण ऐसा किया गया। वीरवार को दिनभर दोनों ग्रुपों में चिट्ठीवार चला। साथ ही अपने को सही साबित करने के लिए तमाम सवाल उठाए। खालिद ग्रुप का कहना है कि चुनाव से एक दिन पहले स्थगन के आदेेश समझ से परे हैं जबकि सभी तैयारियां हो गई थीं। वहीं मृत्युंजय ग्रुप का कहना है कि वीसी के खास लोगों ने चुनाव स्थगित करवाया है।
प्रेसवार्ता के जरिए खालिद-सिद्धू ग्रुप ने उठाए सवाल
-पुटा का चुनाव अचानक स्थगित होने से शिक्षक समाज स्तब्ध है। हमने चुनाव अधिकारी व पुटा के पूर्व सचिव से वह सभी पत्र फैकल्टी को उपलब्ध कराने को कहा है जिनके जरिए चुुनाव रोका गया। साथ ही उनकी ओर से चुनाव के लिए लिखे पत्र भी उपलब्ध कराने को कहा है।
- चुनाव अधिकारी सबसे अधिक पूर्व सचिव के करीब रहे। चुनाव स्थगन की जानकारी उन्हें थी, लेकिन उन्होंने शिक्षकों से छिपाया।
- प्रो. एमसी सिद्धू को मृत्युंजय ग्रुप के एक व्यक्ति ने एक दिन पहले ही बता दिया कि चुनाव स्थगित होने वाले हैं। यानी मृत्युंजय ग्रुप को पहले से ही इस बात का पता था कि चुनाव स्थगित किए जा रहे हैं।
- जब चुनाव अधिकारी ने चुनाव के लिए डीसी चंडीगढ़ का पत्र लिखा और वहां से जवाब नहीं मिला तो चुनाव की तिथियां क्यों घोषित की गईं। क्या उस समय कोरोना नहीं था, लेकिन उस दौरान चुनाव करवाने के दावे पूरे थे। अचानक चुनाव स्थगित करना एक गेम खेलने के बराबर है।
- पुटा के संविधान में कहीं भी नहीं लिखा कि चुनाव अधिकारी चुनाव की तिथि तय करते हैं, लेकिन चुनाव अधिकारी का प्रयोग किया गया और उनकी आड़ में गेम खेला गया।
- यूजीसी की गाइड लाइन के जरिए शिक्षकों पर पीयू प्रशासन दबाव बना रहा है, ऐसे में पुटा की सबसे अधिक जरूरत थी, लेकिन चुनाव स्थगित करवाए गए।
- पुटा का तीन साल से कार्यकाल संभाल रहे पदाधिकारियों के गेम को हमने प्रमुखता से उजागर किया और शिक्षक समुदाय बड़ी संख्या में हमारे साथ आ गया। शिक्षकों को समझ में आया कि उनका प्रयोग वोट लेने के लिए किया गया। इसलिए हम जीत की ओर थे।
- पुटा के लेटरहेड का प्रयोग कर राजनीति शब्दों का प्रयोग किया गया जबकि पुटा एक शिक्षकों का संगठन है।