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खालिद व मृत्युंजय ग्रुप में घमासान... एक-दूसरे पर लगाया पुटा चुनाव स्थगित किए जाने का आरोप

Fri, 25 Sep 2020 04:32 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला, चंडीगढ़
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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पुटा के चुनाव स्थगित होते ही खालिद और मृत्युंजय ग्रुप में घमासान मच गया। दोनों ग्रुप एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं कि उनके कारण चुनाव स्थगित किए गए हैं। दोनों ही पक्षों का दावा है कि उनकी जीत सुनिश्चित थी इस कारण ऐसा किया गया। वीरवार को दिनभर दोनों ग्रुपों में चिट्ठीवार चला। साथ ही अपने को सही साबित करने के लिए तमाम सवाल उठाए। खालिद ग्रुप का कहना है कि चुनाव से एक दिन पहले स्थगन के आदेेश समझ से परे हैं जबकि सभी तैयारियां हो गई थीं। वहीं मृत्युंजय ग्रुप का कहना है कि वीसी के खास लोगों ने चुनाव स्थगित करवाया है।
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प्रेसवार्ता के जरिए खालिद-सिद्धू ग्रुप ने उठाए सवाल
-पुटा का चुनाव अचानक स्थगित होने से शिक्षक समाज स्तब्ध है। हमने चुनाव अधिकारी व पुटा के पूर्व सचिव से वह सभी पत्र फैकल्टी को उपलब्ध कराने को कहा है जिनके जरिए चुुनाव रोका गया। साथ ही उनकी ओर से चुनाव के लिए लिखे पत्र भी उपलब्ध कराने को कहा है।

- चुनाव अधिकारी सबसे अधिक पूर्व सचिव के करीब रहे। चुनाव स्थगन की जानकारी उन्हें थी, लेकिन उन्होंने शिक्षकों से छिपाया।
- प्रो. एमसी सिद्धू को मृत्युंजय ग्रुप के एक व्यक्ति ने एक दिन पहले ही बता दिया कि चुनाव स्थगित होने वाले हैं। यानी मृत्युंजय ग्रुप को पहले से ही इस बात का पता था कि चुनाव स्थगित किए जा रहे हैं।
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- जब चुनाव अधिकारी ने चुनाव के लिए डीसी चंडीगढ़ का पत्र लिखा और वहां से जवाब नहीं मिला तो चुनाव की तिथियां क्यों घोषित की गईं। क्या उस समय कोरोना नहीं था, लेकिन उस दौरान चुनाव करवाने के दावे पूरे थे। अचानक चुनाव स्थगित करना एक गेम खेलने के बराबर है।

- पुटा के संविधान में कहीं भी नहीं लिखा कि चुनाव अधिकारी चुनाव की तिथि तय करते हैं, लेकिन चुनाव अधिकारी का प्रयोग किया गया और उनकी आड़ में गेम खेला गया।
- यूजीसी की गाइड लाइन के जरिए शिक्षकों पर पीयू प्रशासन दबाव बना रहा है, ऐसे में पुटा की सबसे अधिक जरूरत थी, लेकिन चुनाव स्थगित करवाए गए।

- पुटा का तीन साल से कार्यकाल संभाल रहे पदाधिकारियों के गेम को हमने प्रमुखता से उजागर किया और शिक्षक समुदाय बड़ी संख्या में हमारे साथ आ गया। शिक्षकों को समझ में आया कि उनका प्रयोग वोट लेने के लिए किया गया। इसलिए हम जीत की ओर थे।
- पुटा के लेटरहेड का प्रयोग कर राजनीति शब्दों का प्रयोग किया गया जबकि पुटा एक शिक्षकों का संगठन है।
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ये हैं मृत्युंजय ग्रुप के आरोप

- वीसी के खास लोगों ने पत्र भेजकर पुटा का चुनाव स्थगित करवाया। इससे साबित होता है कि वह वीसी ग्रुप से हैं। पुटा चुनाव स्थगित कर वह पुटा को कमजोर करना चाहते हैं। यह लोकतंत्र की हत्या है।
- उन्हें पहले ही पता था कि चुनाव को स्थगित करवाने की साजिश चल रही है और उसमें वह लोग कामयाब हुए।

- स्कूल खोले जा रहे हैं, तमाम कार्य हो रहे हैं बावजूद इसके पुटा चुनाव स्थगित किए गए, क्यों।
- पुटा चुनाव वह जीत रहे थे, शिक्षक समुदाय उनके साथ था लेकिन जान-बूझकर चुनाव स्थगित करवाए गए।
- हम चुनाव के पक्ष में हैं और आगे भी रहेंगे। जल्द चुनाव करवाने की मांग करेंगे।

स्कूल खुले, लेकिन विश्वविद्यालय क्यों नहीं खुलवाया
पीयू के कुछ शिक्षकों ने यह भी कहा है कि पुटा के पूर्व पदाधिकारियों ने कहा है कि स्कूल खुल गए हैं, लेकिन चुनाव रोक दिए गए। उन्होंने सवाल किया कि स्कूल तो खुले, लेकिन क्या पुटा ने विश्वविद्यालय खोलने की मांग की। रिसर्च काफी समय से प्रभावित है, उसके लिए रिसर्च स्कॉलर्स को वापस बुलवाने की मांग तक नहीं की गई। कई अन्य सवाल भी शिक्षकों ने उठाए हैं।
चुनाव स्थगित होने से मैं स्तब्ध हूं। पूरा शिक्षक समाज भी स्तब्ध है। चुनाव से एक दिन पहले चुनाव स्थगित करना समझ से परे है। हमने आंकड़ों के जरिए पुटा के पूर्व कार्यकाल को सामने रखा और शिक्षक समाज हमारे साथ आ गया। शायद चुनाव स्थगन का यह भी कारण हो सकता है। हम जीत की ओर थे। हम चुनाव के पक्ष में हैं।
- प्रो. मोहम्मद खालिद अध्यक्ष पद उम्मीदवार

वीसी ग्रुप के कुछ लोगों ने चुनाव स्थगित करवाकर लोकतंत्र की हत्या की है। पुटा को प्रभावित करने की कोशिश की गई है। हम जीत रहे थे और शिक्षकों का समर्थन मिल रहा था। हम चुनाव करवाने के लिए फिर कोशिश करेंगे। शिक्षकों ने साथ दिया, उसके लिए उनका आभार। आगे भी हम पुटा व शिक्षकों के हित में खड़े रहेंगे।
- डॉ. मृत्युंजय कुमार, अध्यक्ष पद के उम्मीदवार
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