चंडीगढ़। नॉर्थ जोन कल्चरल सेंटर पटियाला की ओर से मिनी टैगोर थियेटर में आधुनिक हिंदी साहित्य के छायावादी महाकवि, कथाकार, उपन्यासकार, नाटककार जयशंकर प्रसाद और सुप्रसिद्ध महाकवि, गीतकार पद्मभूषण गोपालदास ‘नीरज’ के जन्म दिवस पर उनको शब्द सुमन अर्पित करने के लिए विशेष कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस कवि सम्मेलन की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार जय गोपाल ‘अश्क’ ने की। इसका मंच संचालन कवयित्री और चरित्र अभिनेत्री डॉ. उर्मिला कौशिक ‘सखी’ ने किया।
महाकवि जयशंकर प्रसाद के कृतित्व और व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए डॉ. सुशील ‘हसरत’ नरेलवी ने कहा कि ‘30 जनवरी, 1889 को काशी के सरायगोवर्धन में जन्मे जयशंकर प्रसाद छायावाद के प्रतिष्ठापक तो थे ही साथ ही छायावादी पद्धति पर सरस संगीतमय गीतों के लिखने वाले श्रेष्ठ कवि थे। कवयित्री नेहा अरोरा ने प्रसाद रचित नाटक ‘चन्द्रगुप्त’ से मातृभूमि वंदना का सिरमौर गीत ‘अरुण यह मधुमय देश हमारा’ और देशभक्ति से ओत-प्रोत रचना ‘हिमाद्रि तुंग श्रृृंग से प्रबुद्ध शुद्ध भारती, स्वयं प्रभा समुज्जवला स्वतंत्रता पुकारती’ सुनाई।
उर्मिला कौशिक ‘सखी’ ने प्रसाद की काव्यकृति ‘कामायनी’ के लज्जा सर्ग भाग-2 से गीतात्मक कविता ‘मैं रति की प्रतिकृति लज्जा हूं, मैं शालिनता सिखाती हूं, मतवाली सुंदरता पग में, नूपुर सी लिपट जाती हूं.. सुनाकर श्रोताओं का दिल जीत लिया। इसके बाद गीतकार गोपालदास नीरज के साहित्यिक एवं कला के क्षेत्र में किए गए योगदान पर डॉ. उर्मिला कौशिक ‘सखी’ ने कहा कि ‘कालजयी रचनाकार गोपालदास नीरज ने मंच पर हिंदी कविता को नयी बुलंदियों तक पहुंचाया। कवि बलवंत ‘तक्षक’ ने ‘नीरज’ का गीत ‘आज की रात तुझे आखिरी खत और लिख दूं.. सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। सतराजीत ने ‘नीरज’ के कुछेक मुक्तक आप मत पूछिए क्या हम पे सफर में गुजरी, था लुटेरों का जहां गांव, वहीं रात हुई.. सुनाकर समा बांध दिया। उनके बाद उन्होंने गजल सुनाई ‘जितना कम सामान रहेगा, उतना सफर आसान रहेगा’ सुनाया । सुशील ‘हसरत’ नरेलवी ने गोपाल दास ‘नीरज’ के लिखे गीत ‘कारवां गुजर गया गुबार देखते रहे’ सुनाया।
इस विशेष कवि सम्मेलन में शायर जयगोपाल ‘अश्क’ ने अपनी गजल ‘हर तरफ राहों में हैं नक्शे-कदम बिखरे हुए, मंजिलें हैं लापता, भटके हुए हैं काफिले’ सुनाई। यहां राजन ‘सुदामा’ ने अपनी गजल ‘नुमाइश में पड़ी है यार दुनिया, लगाए झूठ का बाजार दुनिया’ सुनाई। इस मौके पर हास्य-कलाकार बाबू लाल ने अपनी हास्य-फुलझड़ियों से दर्शकों को लोटपोट किया।