पंचकूला के निकट घग्गर नदी पर बनाए गए कौशल्या बांध को विशेषज्ञों ने जांच रिपोर्ट में ‘वाटर बम’ बताया था। इसके बावजूद निर्माण में जिस तरह की लापरवाही बरती गई है, वह पंचकूला और चंडीगढ़ के लिए गंभीर खतरा है।
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मामले में वित्तीय अनियमितताओं की जांच कर रही विजिलेंस ब्यूरो ने सिंचाई विभाग द्वारा तैयार रिपोर्ट वह रिपोर्ट भी ढूंढ ली है, जिसके निष्कर्षों की अनदेखी कर इस बांध का निर्माण किया गया। निर्माण में अनियमितताओं की जांच रिपोर्ट जल्द ही हरियाणा सरकार को सौंप दी जाएगी।
बांध का निर्माण हुआ नियमों के विपरीत
इस मामले में शिकायतकर्ता विजय बंसल ने विजिलेंस के समक्ष पेश होकर सिंचाई विभाग की जांच रिपोर्ट सौंपी है। इस जांच रिपोर्ट में छह साल पहले ही बांध के निर्माण को नियमों के विपरीत बताया गया है। विजिलेंस ब्यूरो द्वारा गठित एसआईटी इस मामले की जांच कर रही है। डेढ़ माह पहले भाजपा सरकार ने विजिलेंस को इस मामले की जांच सौंपी थी।
एसआईटी में आईजी माता रविकिरण, एसपी मनवीर और सिचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता आर. कंबोज शामिल हैं, जो निर्माण स्थल का भी निरीक्षण कर चुके है। विजिलेंस ब्यूरो जल्द ही बांध का निर्माण करने वाली कंपनी के अलावा दो और कंपनियों से पूछताछ की तैयारी कर रही है। यह अन्य दो कंपनियां वह हैं जिन्हें हरियाणा नगर योजनाकार विभाग ने कौशल्या बांध के नजदीक कालोनियां निर्माण करने का लाइसेंस दिया था।
वाटर बम क्यों निर्माण सामग्री घटिया इस्तेमाल की गई। लेयर के हिसाब से कोई सैंपलिंग नहीं की गई, जिससे पता लगाया जा सकता कि यह बांध कितना सुरक्षित रहेगा। ड्राइ बल्क डेनिसिटी जांच के लिए एक लैब की व्यवस्था निर्माणस्थल पर होनी चाहिए मगर साइट नंबर छह पर जांच के समय एक प्लास्टिक की टोकरी, एक टब, गिलास सिलेंडर, स्टोव और प्लास्टिक की कुर्सियां तो मिलीं पर ऐसा कुछ नहीं कि कहा जा सके कि यहां कोई लैब भी बनाई गई। सोइल क्वालिटी भी घटिया है।
ऐसे पहुंचाया बिल्डरों को फायदा
शिकायत के अनुसार, हरियाणा सरकार के सिंचाई विभाग ने पिंजौर में साल 2005 में 51 करोड़ की लागत से कौशल्या बांध का निर्माण मंजूर किया था। कौशल्या बांध का निर्माण साल 2008 में शुरू किया गया। इसके निर्माण पर अब तक 217 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
शिकायत के अनुसार, आरोप है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की सरकार ने बिना किसी तकनीकी सलाह के इस बांध की दीवार की चौड़ाई 12 से बढ़ाकर 30 फुट करने के हरियाणा सिंचाई विभाग को आदेश दे दिए थे, जिस कारण इसकी लागत 118 से बढ़ाकर 180 करोड़ हो गई। आरोप है कि बांध के निर्माण के दौरान निर्माण कंपनी ने कौशल्या नदी में से अवैध खनन करके करोड़ों के मिट्टी, पत्थर व रेत बेच दिए।
छह साल पहले सिंचाई विभाग की ओर से की गई जांच रिपोर्ट विजिलेंस ब्यूरो द्वारा गठित एसआईटी को सौंप दी है। जांच रिपोर्ट में डैम को वाटर बम बताया गया है। पिछली सरकार ने दोनों बिल्डरों की कालोनियों को रास्ता देने और लाभ पहुंचाने के लिए बांध की दीवार की चौड़ाई 12 से 30 फुट करने के आदेश दिए थे। -विजय बंसल, शिकायतकर्ता।
कौशल्या डैम काफी अच्छी परियोजना है। अनियमितताओं में जो भी दोषी पाया जाए, उस पर कार्रवाई होनी चाहिए। भूपेंद्र सिंह हुड्डा, पूर्व मुख्यमंत्री, हरियाणा।
कौशल्या बांध के निर्माण में अनियमितताओं के बारे में 2008 में हरियाणा सिंचाई विभाग द्वारा जांच कराई गई थी। तत्कालीन एक्सईएन (विजिलेंस) जीएस नरवाल ने सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता को बांध की इंस्पेक्शन रिपोर्ट भेजते हुए लिखा था कि 12 सितंबर, 2008 को एसडीओ अश्विनी कुमार और एएसडीई (विजिलेंस) वीरेंद्र कुमार सैनी ने बांध का दौरा करके बताया है कि बांध के दाएं हिस्से में इंजीनियरिंग स्टाफ की मौजूदगी के बगैर ही काम जारी है।
साइट पर निर्माण सामग्री की जांच करने पर सामग्री तय मानदंड के कमजोर पाई गई। जांच के लिए गए अधिकारियों ने यह सुझाव भी दिया कि विभाग द्वारा साइट पर निर्माण सामग्री की जांच के लिए लैब और एक कार्यालय स्थापित किया जाए। यह भी कहा गया कि इस मामले से जुड़े एग्जीक्युटिव इंजीनियर ने कार्य की जांच पर ध्यान देने की बजाए निर्माण करने वाली कंपनी को भुगतान करने में ज्यादा जल्दी दिखाई।
जांच अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट में साफ लिखा कि विभाग को बांध के काम पर गंभीरता से नजर रखनी चाहिए, अन्यथा यह बांध सिटी ब्युटीफुल चंडीगढ़, पंचकूला और अमरावती कांप्लेक्स के लिए ‘वॉटर बम’ साबित हो सकता है। जीएस नरवाल ने यह रिपोर्ट उस समय सिंचाई विभाग के विशेष सचिव और मुख्य विजिलेंस अधिकारी, आईडीएचओ के इंजीनियर-इन-चीफ, पंचकूला विजिलेंस सर्कल और अंबाला में एसवाईएल सर्कल के सुपरिटेंडिंग इंजीनियर के अलावा पंचकूला में विजिलेंस सब डिवीजन के एसडीओ को भी भेजी थी।