यूं तो क्राफ्ट मेले में तरह तरह की शिल्पकलाएं, लोकनृत्य व कलाकारियां देखने को मिल रही हैं, लेकिन वहां लोगों के मुख्य आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं, राजस्थान के अजमेर से आई 25 कठपुतलियां।
इन कठपुतलियों में एक दो सौ साल पुरानी है। कठपुतलियों के मालिक बाबूलाल का कहना है कि उनके पूर्वज मेलों में कठपुतलियों को नचाते आ रहे हैं। पहले कुछ और जमाना था, आज कुछ और।
कठपुतलियों में फर्क इतना आया कि इनका पहनावा बदल गया। अब इन्हें रंग भी देना पड़ता है। वैसे अगर आज के वक्त की बात की जाए तो ये सरकार की मेहरबानी है कि यह कला अभी तक जीवित है।
आगे इस कला को जारी रखने पर वे बताते हैं कि वे अपने बच्चों को यह काम नहीं करने देंगे, क्योंकि इसमें ज्यादा कमाई नहीं होती है, उल्टा पल्ले से ही खर्च होता है।
बीते दिन कलाग्राम में क्राफ्ट मेले के दौरान काफी भीड़ देखने को मिल रही थी। भीड़ के कारण लोगों को जाम से भी गुजरना पड़ रहा है लेकिन उत्साह कम नहीं हो रहा है। लोग यहां खूब खरीददारी कर रहे हैं।