चंडीगढ़। एयरफोर्स के मिलिट्री इंजीनियर सर्विस (एमईएस) की याचिका को सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) ने मंजूर करते हुए औद्योगिक कर्मचारी और गैर-औद्योगिक कर्मचारी से रिकवरी करने पर रोक लगा दी है। साथ ही कोर्ट ने यह भी आदेश दिया है कि यदि इन कर्मचारियों से किसी प्रकार की रिकवरी की गई है तो उसे भी कर्मचारियों को वापस किया जाए।
जानकारी के अनुसार एयरफोर्स के ग्रुप सी के एमईएस कर्मचारियों ने कैट में 13 याचिकाएं दर्ज की थीं। ये याचिकाएं चंडीगढ़, कपूरथला, पटियाला, फिरोजपुर, चंबा, कांगड़ा, पंचकूला, संगरूर समेत कई जगह के लगभग 750 कर्मचारियों ने दायर की थीं। याचिका में उल्लेख किया गया था कि प्रिंसिपल कंट्रोलर ऑफ डिफेंस अकाउंट्स (पीसीडीए) नेे 2017 में एमईएस कर्मचारियों को ड्रेस एलाउंस देने का एक आदेश पास किया था। उसके बाद से उन्हें हर साल यह भत्ता मिलने लगा। इस भत्ते में उनकी ड्रेस से संबंधित सभी भत्ते जैसे स्टिचिंग, शूज और रखरखाव समेत कई भत्ते शामिल थे। कुछ समय बाद यूनियन ऑफ इंडिया ने औद्योगिक और गैर-औद्योगिक कर्मचारियों से इस अलाउंस की रिकवरी के आदेश पास कर दिए जिसे ग्रुप सी के एमईएस कर्मचारियों ने कैट में चुनौती दी।
अभियोजन पक्ष के वकील ने तर्क देते हुए कहा कि इन कर्मचारियों से रिकवरी करना गलत है क्योंकि ये कर्मचारी ग्रुप सी में आते हैं और सभी कर्मचारी मिलिट्री इंजीनियर सर्विस में शामिल है। जानकारी के अनुसार ग्रुप सी के सभी कर्मचारियों ने मिलकर दिल्ली के साउथ ब्लॉक की डिफेंस मिनिस्ट्री, पंचकूला हेडक्वार्टर के चीफ इंजीनियर, दिल्ली हेडक्वार्टर के इंजीनियर इन चीफ (एमईएस), सेक्टर-9 चंडीगढ़ के मुख्यालय, पटियाला, कपूरथला, शिमला, जालंधर, तुगलकाबाद, कसौली आदि के मुख्यलय के खिलाफ कैट में याचिका दायर की थी।