कश्मीरी पंडितों के घाटी छोड़ने के बाद बहादुरगढ़ आए और जमापूंजी से प्लाट खरीदे, जिनका सरकार ने अधिग्रहण कर लिया। अधिग्रहण के बाद उनको अन्य स्थान पर भूमि देने का सरकार का वादा 30 साल बीत जाने के बाद भी पूरा नहीं हुआ है। अब कश्मीरी पंडितों ने इंसाफ के लिए हाईकोर्ट से गुहार लगाई है।
कश्मीरी पंडित एसोसिएशन ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए बताया कि मोती लाल खारू समेत अन्य कश्मीरी पंडितों ने बिगड़ते हालात के बीच 1989-90 में घाटी छोड़ने का फैसला लिया था। कश्मीर को छोड़कर जब वह हरियाणा के बहादुरगढ़ आए तो अपनी जमा पूंजी से 200-300 गज के प्लाट खरीदे। इसके बाद 1995 में हरियाणा सरकार ने कश्मीरी पंडितों की खरीदी हुई 10 एकड़ जमीन का जनहित के नाम पर अधिग्रहण करने का फैसला लिया था।