करतारपुर साहिब कॉरिडोर का शिलान्यास रखने के बाद व्यापार के लिए भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय हुसैनीवाला बॉर्डर खुलने की उम्मीद फिर से जाग उठी है। कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू जब भी फिरोजपुर आए, उन्होंने हुसैनीवाला बॉर्डर खुलवाने का वादा किया था। जिस तरह सिद्धू के पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ दोस्ताना संबंध है, उसे देख फिरोजपुर के लोगों को हुसैनीवाला बॉर्डर खुलने की उम्मीद होने लगी है।
1971 से पहले उक्त बॉर्डर दोनों देशों के बीच व्यापार संबंधी खुला था, जंग के बाद इसे बंद कर दिया गया था। 1947 के गदर में यहां से ट्रेन के जरिए पाक छोड़कर आए मुसलमानों और वहां से हिंदुओं को लेकर आए ट्रेन के गार्ड 94 वर्षीय बाल किशन गुप्ता (रेलवे से चीफ कंट्रोल सेवानिवृत्त) ने कहा कि हुसैनीवाला बॉर्डर व्यापार के लिए खुल सकता है।
ये होंगे फायदे
हुसैनीवाला बॉर्डर
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बॉर्डर खुलने से फिरोजपुर का विकास होगा और रोजगार के साधन बढ़ेंगे। 1971 से पहले यहां पर ड्राईफ्रूट, फल और अन्य वस्तुओं का व्यापार होता था। बॉर्डर पर दिन-रात लोग काम करते थे। हुसैनीवाला बॉर्डर से दोनों देशों के बीच रेल सेवा भी बहाल हो सकती है। बंटवारे से पहले हुसैनीवाला बॉर्डर से पाक के गंडा सिंह बॉर्डर से होकर ट्रेन लाहौर जाती थी।
समाजसेवी सम्मी चंद ने कहा कि कांग्रेस के सीनियर नेता सुनील जाखड़ भी लोकसभा चुनाव के दौरान हुसैनीवाला बॉर्डर खुलवाने का वादा कर चुके हैं। इसी तरह सांसद शेर सिंह घुबाया भी कई बार हुसैनीवाला बॉर्डर खुलवाने की बात कह चुके हैं। किसान सतनाम सिंह का कहना है कि हुसैनीवाला बॉर्डर खुलता है तो किसान अपनी फसल अच्छे दामों पर पाक जाकर भी बेच सकेंगे। पाक ने गंडा सिंह बॉर्डर तक बहुत चौड़ी सड़क का निर्माण किया हुआ है, वहीं भारत ने भी बढ़िया सड़क बनाई है।