उन्होंने कहा कि श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के मौके पर लाखों श्रद्धालु गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब के दर्शनों की इच्छा रखते हैं लेकिन इन रुकावटों के कारण उनको वापस जाना पड़ता है। कैप्टन ने कहा कि गलियारा खुलने से पहले भले ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने ट्वीट किया था कि गलियारे से आने वाले श्रद्धालुओं को पासपोर्ट की जरूरत नहीं होगी लेकिन यह फैसला औपचारिक तौर पर नहीं था।
उन्होंने इमरान खान के साथ-साथ भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की कि पासपोर्ट की शर्त संबंधी किए एमओयू में संशोधन करके इस समस्या को सुलझाया जाए। उन्होंने कहा कि यदि श्रद्धालु करतारपुर गलियारा पार करके दर्शनों की इच्छा पूरी न कर सके तो दोनों सरकारों के साझे प्रयासों का मंतव्य अधूरा रह जाएगा।
श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के मौके पर एसजीपीसी द्वारा बड़े खर्च करके विभिन्न प्रोग्राम करवाए जाने का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे सिद्ध होता है कि इस धार्मिक संस्था के पास धन की कोई कमी नहीं है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि अपने अहंकार को शांत करने और इस धार्मिक मौके को राजनैतिक नुक्ते के तौर पर उभारने के लिए धन का प्रदर्शन करने की बजाय, उनकी तरफ से श्री करतारपुर साहिब के दर्शनों की इच्छा रखने वाले श्रद्धालुओं, खासकर पीले कार्ड धारकों की 20 डॉलर की फीस भरनी चाहिए थी।
कैप्टन ने सवाल किया, 'एसजीपीसी और उसके राजनैतिक आका शिरोमणि अकाली दल, खासकर बादल परिवार भाईचारे के लिए धन के रूप में कुछ योगदान क्यों नहीं कर सकते।’ उन्होंने कहा कि सिखों के रक्षक होने के बड़े-बड़े दावे करने वाले अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल और उनकी पत्नी हरसिमरत कौर बादल एसजीपीसी जो कि उनके कंट्रोल में है, को कम-से-कम यह तो कह सकते हैं कि गुरुद्वारा साहिब के दर्शन की इच्छा रखने वाले गरीब श्रद्धालुओं की सहायता की जाए क्योंकि यदि ऐसा न किया गया तो इन श्रद्धालुओं के सपने कभी भी हकीकत नहीं बन सकते।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सिख भाईचारे की धार्मिक संस्था होने के नाते एसजीपीसी की यह जिम्मेदारी बनती है कि न सिर्फ सिखों बल्कि महान गुरु साहिब जी के सभी श्रद्धालुओं द्वारा गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब के दर्शन करने की बहुप्रतीक्षित ख्वाहिश को पूरा करना यकीनी बनाया जाए।