हत्या के मामले में करौंथा आश्रम के संचालक रामपाल की वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से एडीजे फखरुद्दीन की अदालत में पेशी हुई। साथ में गवाहों के लिए आठ में से मात्र एक एएसआई पवन पहुंचे। एएसआई द्वारा गिरफ्तार आरोपी आजाद के पेश न होने के कारण उसकी भी गवाही नहीं हो सकी, जबकि दूसरे गवाह जम्मू जिला प्रशासन की पीएलए ब्रांच के क्लर्क सुनील कुमार नहीं आए।
जम्मू डीएम से अदालत ने मामले में आरोपी आजाद के गन लाइसेंस का ब्यौरा और क्लर्क को गवाही के लिए बुलाया था, लेकिन वहां से लाइसेंस का कोई ब्यौरा नहीं भेजा गया। साथ ही लिखा गया है कि इस नाम का कर्मचारी पीएलए ब्रांच में अब नहीं है। केस को अदालत में चलते 12 साल पूरे हो चुके हैं, लेकिन अब भी केस में गवाही पूरी नहीं हो सकी हैं। अब अदालत ने मामले में छह गवाहों को सम्मन भेजे हैं, जिनकी 22 फरवरी को गवाही होगी।
इसके अलावा फोरेंसिक विभाग के डायरेक्टर को भी गवाही के लिए अदालत ने बुलाया है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक 2006 में करौंथा आश्रम के बाहर हिंसा में झज्जर जिले के युवक संदीप की गोली लगने से मौत हो गई थी, जबकि दर्जनों घायल हुए थे। उस समय रामपाल सहित 38 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। हालांकि बाद में कई आरोपी पीओ घोषित हो गए। अब 28 के खिलाफ जिला अदालत में सुनवाई चल रही है।
एक डॉक्टर विदेश में, दूसरा छत्तीसगढ़, तीसरे का पता पूरा नहीं
एक दशक से ज्यादा समय से चल रहे केस के अंदर उस समय घायलों की एमएलआर काटने वाले डाक्टर दीपक गर्ग, डॉक्टर रोहित व एक जूनियर रेजिडेंट की गवाही के लिए अदालत ने पीजीआईएमएस प्रशासन को सम्मन भेजे थे। पीजीआईएमएस ने लिखकर भेजा है कि डॉक्टर दीपक गर्ग विदेश स्टडी के लिए गए हैं, जबकि डॉक्टर रोहित छत्तीसगढ़ में हैं। वहीं, जूनियर डॉक्टर का पूरा पता नहीं है। अब अदालत ने दोबारा से डॉक्टरों को गवाही देने के लिए बुलाया है।
जम्मू प्रशासन ने लिखकर भेजा, नहीं सुनील नाम का क्लर्क
पुलिस द्वारा अदालत में दाखिल चालान के अंदर लिखा है कि मामले में आरोपी आजाद सिंह का गन लाइसेंस जम्मू से बनवाया गया है। पुलिस की टीम जब जम्मू जांच करने गई तो वहां क्लर्क सुनील कुमार के बयान दर्ज किए गए थे। अदालत ने सुनील को गवाही के लिए बुलाया था, लेकिन अब वहां के प्रशासन ने लिखकर भेजा है कि इस नाम का कर्मचारी है ही नहीं। इससे पुलिस की जांच पर सवाल खड़े होना लाजमी है।
यह था मामला
रामपाल ने 1999 में करौंथा गांव में झज्जर रोड पर सतलोक आश्रम की स्थापना की थी। 1999 से 7 जून, 1999 तक लगातार सप्ताह भर सत्संग हुआ। बाद में स्वामी दयानंद द्वारा लिखित पुस्तक सत्यार्थ प्रकाश पर कथित टिप्पणी को लेकर आर्य समाजियों और रामपाल समर्थकों के बीच तनाव पैदा हो गया। आर्य समाजियों के साथ करौंथा और साथ लगते गांवों के लोगों ने भी रामपाल के प्रवचनों पर आपत्ति जताना शुरू कर दिया। 12 जुलाई, 2006 को करौंथा आश्रम के बाहर हुई हिंसा में संदीप नाम के युवक की गोली लगने से मौत हो गई। जबकि कई अन्य घायल हो गए थे। सदर थाने में रामपाल सहित 38 लोगों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया गया था, जिसकी अब भी सुनवाई चल रही है।
शुक्रवार को अदालत में एक गवाह एएसआई पवन पेश हुए, लेकिन उनकी गवाही नहीं हो सकी। क्योंकि उन्होंने जिस आरोपी आजाद को गिरफ्तार किया था, वे पीओ घोषित हैं। अब डाक्टर व दूसरे गवाहों को 22 फरवरी को अदालत में पेश होने का नोटिस भेजा गया है।
वीरेंद्र देशवाल, वकील बचाव पक्ष
पुलिस द्वारा दाखिल चार्जशीट के अंदर स्पष्ट किया गया है कि एक आरोपी आजाद का गन लाइसेंस जम्मू से बना है। अदालत ने जम्मू डीएम से लाइसेंस का ब्योरा व क्लर्क सुनील को गवाही के लिए नोटिस दिया था। अब नोटिस के जवाब में लिखकर भेजा गया है कि इस नाम का क्लर्क पीएलए ब्रांच में नहीं है, न ही लाइसेंस का रिकार्ड भेजा गया है।
सुनील कुमार, वकील बचाव पक्ष