करनाल लोकसभा क्षेत्र से सांसद डा.अरविंद शर्मा ने आखिर कांग्रेस को अलविदा कह दिया। वे विधानसभा में मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट करने की शर्त पर बहुजन समाज पार्टी में शामिल हुए।
दिल्ली में बसपा सुप्रीमो मायावती से लंबी मुलाकात के बाद उन्होंने कांग्रेस पार्टी को छोडऩे की घोषणा कर दी। डा.अरविंद शर्मा पिछले पांच साल से बसपा के संपर्क में थे और पहले भी ज्वाइनिंग करते-करते रूके थे। कई दिन से उनके कांग्रेस छोडऩे की अटकलें लगाई जा रही थी।
तीन बार बने सांसद, दो बार करनाल से
डा.अरविंद शर्मा ने अपना पहला लोकसभा चुनाव वर्ष 1996 में सोनीपत लोकसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में लड़ा और जीतकर लोकसभा पहुंचे। वर्ष 1998 में वे इसी सीट से हार गए और इसके बाद उन्होंने सोनीपत को छोड़कर करनाल लोकसभा सीट पर दावा ठोका।
वर्ष 2004 में उन्होंने कांग्रेस की सीट पर यहां से चुनाव लड़ा और पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री आईडी स्वामी को करीब डेढ़ लाख वोटों से हराया। वर्ष 2009 में उन्होंने एक बार फिर कांग्रेस की टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़ते हुए आईडी स्वामी को 50 हजार वोटों से पराजित किया। लोकसभा चुनाव 2014 में भाजपा के प्रत्याशी अश्विनी कुमार चोपड़ा ने उन्हें करीब साढ़े तीन लाख वोटों से हराया।
वर्ष 2009 से बसपा के संपर्क में
डा.अरविंद शर्मा कांग्रेस से लंबे समय से नाराज चल रहे थे। पार्टी में अनदेखी और क्षेत्र का विकास नहीं होने के कारण उन्होंने कई बार खुले मंचों से अपनी नाराजगी जाहिर भी की। वर्ष 2009 में उन्होंने बसपा सुप्रीमो मायावती से संपर्क में थे।
उस समय उन्होंने बसपा में शामिल होने की पूरी तैयारी कर ली थी, लेकिन कांग्रेस हाईकमान ने उन्हें मना लिया। अब बसपा में औपचारिक ज्वाइनिंग के बाद डा.अरविंद शर्मा सभी 90 हलकों के दौरे पर निकलेंगे और बसपा के लिए प्रचार करेंगे।