कैप्टन ने कहा कि उन्होंने तो पिछली अकाली-भाजपा सरकार द्वारा सतपाल की भर्ती के अवसर पर की गई भूल को ही सुधारा है क्योंकि अकाली-भाजपा सरकार ने इस सैनिक के महान योगदान को दरकिनार किया और जिस सत्कार का यह हकदार था, वह भी पिछली सरकार करने में नाकाम रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनको इस बारे में जानकारी नहीं थी और अब भी इस बहादुर सैनिक के लिए उन्होंने जो कुछ किया है, वह बहुत देर बाद की गई कार्रवाई है। उन्होंने कहा कि सतपाल को आज मिला हक उनकी वर्ष 2010 में हुई भर्ती के मौके ही मिल जाना चाहिए था।
सतपाल के हाथों मरे कर्नल को पाक ने दिया निशान-ए-हैदर, पंजाब ने सतपाल को बनाया कांस्टेबल
सतपाल सिंह (नंबर 2116 /एसजीआर) सेना में सेवा निभाने के बाद पंजाब पुलिस में भर्ती हो गए थे। विजय ऑपरेशन के दौरान सतपाल द्रास सेक्टर में तैनात थे। टाइगर हिल पर कब्जा करने वाली भारतीय सेना की मदद करने वाली टीम के सदस्य के तौर पर सतपाल ने नॉर्दन लाइट इनफैंट्री के कैप्टन कर्नल शेर खान और तीन अन्य को मौत के घाट उतार दिया था।
इसके बाद शेर खान को पाकिस्तान का सबसे बड़ा बहादुरी पुरस्कार निशान-ए-हैदर से सम्मानित किया गया और यह पुरस्कार भारतीय ब्रिगेड कमांडर की सिफारिश पर दिया गया था जिसने बर्फीली चोटियों पर उसके द्वारा दिखाई गई बहादुरी की पुष्टि की थी।